IITs में प्राचीन विज्ञान-तकनीक के शोध के लिए 'संस्कृत सेल' बनाएगी केंद्र सरकार!

नई दिल्ली (20 फरवरी): केंद्र सरकार की तरफ से बनाए गए एक पैनल ने सुझाव दिया है कि केंद्र संचालित शीर्ष इंजीनियरिंग और साइंस इंस्टीट्यूट्स में एक संस्कृत सेल होनी चाहिए। जिससे छात्रों को उनके क्षेत्रों से संबंधित प्राचीन साहित्य में अध्ययन करने में मदद मिल सके। 

'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, पैनल का यह भी कहना है कि ये इंस्टीट्यूट्स छात्रों को पढ़ाई के दौरान क्रैडिट्स के लिए संस्कृत के इंस्टीट्यूट्स में इंटर्नशिप्स करने दें। रिटायर्ड आईएएस अधिकारी एन गोपालस्वामी ने सरकार से कहा है, "इन छात्रों को आर्थिक सहयोग दिया जाए तो उनकी योग्यता को छोटे लेकिन केंद्रित प्रोजेक्ट्स के जरिए संस्कृत साहित्य में छिपे ज्ञान को खोजने में इस्तेमाल किया जा सकेगा।"

गोपालस्वामी एनडीए सरकार के दौरान गृह औऱ संस्कृति सचिव थे। उन्हें रिटायरमेंट के बाद चुनाव आयोग में नियुक्त किया गया था। वरिष्टतम चुनाव आयुक्त के नाते 2006 में उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया था। पैनल को संस्कृत के विकास के लिए 10 साल का रोडमैप बनाने के लिए कहा गया था। जिसने संस्कृत को अंडरग्रैजुएट प्रोग्राम के दौरान एक वैकल्पिक विषय के तौर पर रखने का सुझाव दिया। साथ ही इसे दूसरे विषयों से जोड़ने के लिए भी कहा।

कुछ मायनों में यह बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार का अधूरा एजेंडा है। जिसे अटल बिहारी बाजपेयी के शासन काल के दौरान शुरू किया गया था। आईआईटी दिल्ली ने संस्कृत कोर्सेस को अंडरग्रैजुएट कोर्सेस में संस्कृत को शामिल करने का प्रोजेक्ट शुरू किया था। यह सेल संस्कृत साहित्य में साइंस और टेक्नॉलॉजी के अध्ययन के रास्ते को आसान बनाएगी। इसके अलावा आधुनिक अंतर्विषयी अध्ययनों को भी संस्कृत में पढ़ाने जाने के लिए काम करेगी। पैनल ने मॉ़डल संस्कृत-मीडियम स्कूलों को भी हर राज्य में खोलने का निर्देश दिया है।