अंगदान के लिए बाबाओं की मदद लेगी सरकार

नई दिल्ली(8 अगस्त): आम जनता के बीच अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय अब धर्म गुरुओं का सहारा लेने जा रहा है।

- केंद्रीय मंत्रालय की धार्मिक गुरुओं की इस लिस्ट में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और योगगुरु बाबा रामदेव भी शामिल हैं।

- स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इन गुरुओं के साथ दो राउंड तक चर्चा की और अब ये सभी अंगदान के व्यापक कैंपेन पर काम करेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यह कैंपेन जल्द ही लॉन्च कर दिया जाएगा। कई सर्वे और स्टडी बताती हैं कि लोगों के बीच धारणा है कि अंगदान करने से अगला जन्म प्रभावित होता है।

- लोगों के बीच यह भी धारणा है कि अगर वे अंगदान की प्रतिज्ञा लेते हैं तो जरूरत पड़ने पर उन्हें सबसे बेहतर इलाज मुहैया नहीं कराया जाता। सर्वे बताते हैं कि शहरी इलाकों के लगभग 30 फीसदी लोग मानते हैं कि अंगदान करने वाले लोगों को जान बचाने वाला इलाज उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, जबकि 20 फीसदी मानते हैं कि अंगदान करने से उनका शरीर क्षत-विक्षत हो जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक कई लोग मानते हैं कि धर्म अंगदान की इजाजत नहीं देता है, जबकि दुनिया के 22 धर्मों में से कोई भी अंगदान के खिलाफ नहीं है।

- भारत के प्रमुख धर्म हिंदू, इस्लाम, सिख और ईसाई अंगदान का समर्थन करते हैं और इसे एक-दूसरे के प्रति प्रेम और उदारत के तौर पर देखते हैं। एक अधिकारी के मुताबिक मंत्रालय धर्मगुरुओं को भी इस मुहिम में शामिल करने का प्रयास कर रहा है। एक अधिकारी ने बताया, 'धार्मिक नेताओं और गुरुओं का लोगों पर खासा प्रभाव होता है और उनके समर्थक भी भारी तादाद में होते हैं। उन्हें शामिल करने से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जागरूकता फैलेगी।'

- आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर साल लगभग 95 लाख लोगों की मौत होती है और इनमें से तकरीबन एक लाख लोग ऐसे होते हैं जो अंगदान के लिए सक्षम होते हैं। इसके बावजूद भारत में रोजाना 300 लोग अलग-अलग अंगों के खराब होने की वजह से दम तोड़ देते हैं। इसका मतलब है एक साल में एक लाख से ज्यादा मौतें। डॉक्टरों के मुताबिक मौत के बाद अंगदान करके एक व्यक्ति 50 जिंदगियां तक बचा सकता है। फिर भी गलतफहमियों की वजह से लोग अंगदान करने में हिचकते हैं