त्योहारों के पहले सरकार हुई चौकन्नी, प्याज-चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए उठाया सख्त कदम

नई दिल्ली ( 30 अगस्त ): त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले ही प्याज और चीनी की कीमतों में उछाल से सरकार चौकन्नी हो गई है। अगले महीने से दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे महत्वपूर्ण त्योहार आने वाले हैं। यही नहीं त्यौहारों के अलावा इसी साल आने वाले महीनों में कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी होने हैं, लेकिन इस बीच खासतौर पर प्याज की कीमतों को लेकर जिस तरह से बाजार में अचानक उछाल आया है, उससे सरकार की चिंता बढ़ गई है।

केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को इस पर स्टॉक लिमिट लगाने का निर्देश दे दिया है। इसी के साथ त्योहारी सीजन से पहले चीनी के बढ़ते दाम को देखते हुए इस पर भी स्टॉक लिमिट की घोषणा कर दी गई है। प्याज़ की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों से सटोरियों के खिलाफ एक्शन करने और व्यापारियों पर प्याज की स्टॉक सीमा लागू करने के लिए कहा हैं।

खाद्य मंत्रालय ने कहा कि केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्याज़ के कारोबारियों और सौदागरों पर नियंत्रणकारी कदम लगाए ताकि इस आवश्यक वस्तु की वाजिब दाम पर पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। मंत्रालय ने इस निर्णय को 25 अगस्त को अधिसूचित किया था। खाद्य मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि राज्य सरकारें अब प्याज़ की स्टॉक सीमा तय कर सकती हैं साथ ही जमाख़ोरी विरोध अभियान, सटोरियों और जमाख़ोरों के खिलाफ एक्श्न करने जैसे बहुत से कदम उठा सकती हैं।

सरकार ने चीनी की आपूर्ति को भी दुरुस्त करने और कीमतों को काबू में रखनें के लिए आगामी सितंबर और अक्टूबर महीने के दौरान चीनी मिलों के लिए स्टॉक लिमिट तय कर दी है। ये त्योहारों से पहले कीमतों पर लगाम लगाने की कोशिश है जिसके तहत सितंबर के अंत में स्टॉक सीमा कुल उत्पादन की 21 फीसदी तय की गई है। इसी तरह अक्टूबर के अंत में स्टॉक सीमा कुल उत्पादन की आठ फीसदी तय की गई है।

खाद्य मंत्रालय के बयान के मुताबिक यह कदम हाल के हफ्तों खास जुलाई के अंत से अब तक प्याज़ की कीमतों में अनियंत्रित वृद्धि के चलते उठाया गया है। पूरे भारत के औसत के आधार पर प्याज़ की कीमतें रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 28.94 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। वहीं महानगरों में इसके दाम ओर बढ़े हैं। चेन्नई में यही 31 रुपये प्रति किलोग्राम, दिल्ली में 38 रुपये, कोलकाता में 40 रुपये और मुंबई में 33 रुपये प्रति किलोग्राम तक तक चली गई हैं।