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आनलाइन शापिंग करने वालों को सरकार ने दिया झटका

अगर आप आनलाइन शापिंग करते हैं और ई-कॉमर्स कंपनियां आपको बंपर छूट या कैशबैक देते हैं तो यह खबर आपको निराश कर सकती है, क्योंकि सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) वाली ई-कॉमर्स कंपनियों

Photo: Google 

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (27 दिसंबर): अगर आप आनलाइन शापिंग करते हैं और ई-कॉमर्स कंपनियां आपको बंपर छूट या कैशबैक देते हैं तो यह खबर आपको निराश कर सकती है, क्योंकि सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए प्रावधानों को सख्त कर दिया है। अब Flipkart और Amazon जैसे ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म उन कंपनियों के प्रोडक्‍ट्स नहीं बेच पाएंगे, जिनमें इनकी हिस्सेदारी है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने ऑनलाइन खुदरा कारोबार में एफडीआई के बारे में संशोधित नीति में कहा है कि इन कंपनियों को अपने सभी वेंडरों को बिना भेदभाव किए एक जैसी सेवाएं एवं सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। मंत्रालय ने कहा कि संशोधित प्रवधान का लक्ष्य घरेलू कंपनियों को उन ई-कंपनियों से बचाना है, जिनके पास FDI के जरिए बड़ी पूंजी उपलब्ध है। संशोधित नीति 1 फरवरी 2019 से प्रभावी हो जाएगी। नीति के अनुसार, कोई भी वेंडर अधिकतम 25% प्रोडक्‍ट्स ही किसी एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस के जरिए बेच सकेंगे। सरकार ने यह निर्णय इसलिए लिया है ताकि कोई भी ई-कॉमर्स किसी एक कंपनी के उत्पाद को अपने पास ही रखकर उसके दाम को अपने अनुसार नियंत्रित ना कर पाए।

मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा है कि मार्केटप्लेस की समूह कंपनियों द्वारा खरीदारों को दिए जाने वाले कैशबैक भेदभाव से रहित तथा उचित होने चाहिए। अधिसूचना में यह भी कहा गया कि इन कंपनियों को हर साल 30 सितंबर तक पिछले वित्त वर्ष के लिये दिशानिर्देशों के अनुपालन की पुष्टि को लेकर विधिवत नियुक्त अपने लेखा-परीक्षक की रिपोर्ट के साथ एक प्रमाण-पत्र रिजर्व बैंक के पास जमा कराना होगा।

क्‍यों लिया गया यह निर्णय

मंत्रालय ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को भारी छूट दिए जाने के खिलाफ घरेलू कारोबारियों की आपत्तियों के मद्देनजर ये निर्णय लिए हैं। सरकार ने ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म का परिचालन करने वाली कंपनियों में शत-प्रतिशत विदेशी हिस्सेदारी की छूट दे रखी है पर वे माल की इनवेंट्री (खुद का स्टॉक) बना कर उसकी बिक्री अपने मंच पर नियमत: नहीं कर सकतीं है।

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