'विकास परियोजनाओं में देरी के लिए पूर्वोत्तर राज्य ही जिम्मेदार'

नई दिल्ली (3 मार्च): देश के पूर्वोत्तर इलाकों में विकास योजनाओं में होने वाली देरी के लिए पूर्वोत्तर राज्यों को ही जिम्मेदार ठहराया है। केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों की सुस्ती की वजह से ही कई परियोजनाएं वक्त पर पूरी नहीं हो रही।   रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा में राम प्रसाद शर्मा ने एक पूरक सवाल किया था। जिसके जवाब में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास से जुड़े मामले के मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "पूर्वोत्तर के कई राज्यों ने उपयोगिता प्रमाणपत्र, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट व अन्य जरूरी प्रमाणपत्र समय पर नहीं दिए। जिसके कारण इनके पूरा होने में देरी हुई।" उन्होंने कहा कि ऐसी रिपोर्ट है कि कोष समय पर नहीं जारी किया गया और कई मामलों में उपयोगिता प्रमाणपत्र व अन्य दस्तावेज भेजने में देरी हुई। 

जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) के तहत 81 चालू परियोजनाओं के लिए 505.48 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा चुकी है। जिसके संबंध में 414.89 करोड़ रुपए की राशि के उपयोग प्रमाणपत्र प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि असम राज्य में एनएलसीपीआर योजना के तहत 26 फरवरी, 2016 तक 2609.53 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा चुकी है। जिसके संबंध में 1814.65 करोड़ रुपए की राशि के उपयोगिता प्रमाणपत्र प्राप्त हुए हैं। मंत्री ने कहा कि एनईसी के तहत चालू 81 परियोजनाओं में से 46 देरी से चल रही हैं।