INSIDE STORY: मोदी के 'मिशन #Kashmir' पर बैठक शुरू, 'जम्हूरियत और इंसानियत' के दुश्मनों पर गिरेगी गाज...

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (7 सितंबर): पिछले दो महीने से कश्मीर में जारी हिंसा और तनाव के बीच आज दिल्ली में फिर गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुआई में शांति प्रयासों के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक बुलाई गई है। बैठक में सरकार अपनी अगली रणनीति को लेकर चर्चा कर सकती है। खबर हैं कि इस दौरान सरकार अलगाववादियों पर सख्त रूख अपना सकती है। उनको दी जाने वाले सुविधाओं पर रोक लग सकती है। इनके  पासपोर्ट रद्द किए जा सकते हैं। साथ ही इनको मिली सिक्युरिटी और गाड़ी भी छीनी जा सकती है। 

गौरतलब है कि घाटी में लगातार 60 दिनों से कर्फ्यू और प्रतिबंध जारी हैं। हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद अलगाववादियों ने कश्मीर के युवाओं को भड़काया और पत्थर फैंकने को मजबूर किया। सुरक्षा बलों की कार्यवाही में अबतक 75 से लोगों की मौत हो चुकी है। इन मौतों के जिम्मेदार ये अलगाववादी ही है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में इन अलगाववादियों पर सख्त रूप अपनाते हुए कहा था, ये अलगाववादी, 'कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत' में यकीन नहीं करते। 

जानिए इन अलगाववादियों पर क्यों सख्त हुई सरकार... - 3,4 सितंबर को राजनाथ सिंह की अगुवाई में  सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर के दौरे पर गया था।  - प्रतिनिधिमंडल का मकसद राज्य की सभी पार्टियों और अलग-अलग गुटों से मुलाकात करनी थी।  - अलगाववादियों को भी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत का न्योता दिया था लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया।  - इसके बाद तो प्रतिनिधिमंडल की इन अलगाववादियों ने बेज्जती थी, घर में घुसने तक नहीं दिया। - सैय्यद अली शाह गिलानी ने तो खिड़की से ही छह सांसदों को लौटा दिया था।  - अलगाववादियों के इस रवैये को सांसदों ने अपनी बेइज्जती माना। - इसके बाद सरकार ने अलगाववादियों को लेकर सख्त रुख अख्तियार कर लिया। - अब खबर है कि उनको दी गई सुविधाएं वापिस ले ली जाएंगी।

हमारे पैसों पर कैसे ऐशोआराम करते हैं ये अलगाववादी... - अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा पर सबसे ज्‍यादा खर्च कर रही है सरकार। - 2015 के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 सालों में 560 करोड़ इनकी सुरक्षा पर खर्च किए जा चुके हैं। - सुरक्षा पर सालाना औसतन 112 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, इसमें उनकी दिल्ली यात्रा भी शामिल रही है। - इसके अलावा पिछले 5 सालों के दौरान 26.43 करोड़ सिर्फ पेट्रोल और डीजल पर खर्च हुए। - 21 करोड़ रुपए इन अलगाववादी नेताओं के किसी होटल में रुकने के दौरान खर्च हो चुके हैं। - राज्‍य सरकार की ओर से 1500 पुलिसकर्मियों को घाटी के अलगाववादियों की सुरक्षा में लगाया गया है। - सुरक्षा में निजी अंगरक्षक के रूप में लगभग 500 जवान तैनात हैं। - साथ ही आवासों पर सुरक्षा गार्ड के रूप में लगभग 1000 जवान तैनात हैं। - जम्मू कश्मीर के 22 जिलों में 669 राजनीतिक और गैर राजनीतिक लोगों को विशेष सुरक्षा दी गई है। - इनमें से 294 गैर सूचीकृत लोग हैं, इसी सूची में अलगावादियों को शामिल किया गया है। - सुरक्षा प्राप्त 481 लोगों को पांच साल में 708 वाहन उपलब्ध कराए गए हैं।

क्या-क्या सुविधाएं ली जाएंगी वापिस... - सुत्रों के मुताबिक सबसे पहले अलगाववादी नेताओं के पासपोर्ट रद्द किए जा सकते हैं।  - अब तक ये नेता बड़ी आसानी से वीजा हासिल करके दूसरे देशों खासकर पाकिस्तान आते-जाते रहते थे।  - अली शाह गिलानी, यासीन मलिक और मीर वाइज को जेड सिक्युरिटी मिलती रही है।  - सुत्रों के मुताबिक सरकार अब इनसे ये सुविधा भी छीन सकती है।  - अलगाववादी नेताओं के कश्मीर के बैंकों में कई अकाउंट्स हैं।  - इनकी जांच पहले ही चल रही थी।, अब जांच को तेजी से पूरा करके कार्रवाई की जाएगी।  - एनआईए ने 17 बैंक खातों का पता लगाया जिसमें पाक से 38 करोड़ रुपए की फंडिंग हुई।

कश्मीर के बच्चों से पत्थर फिंकवाते हैं और अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ाते हैं... सैय्यद अली शाह गिलानी (हुर्रियत नेता)- गिलानी का बडा बेटा नईम तथा बहू बजिया पाकिस्तान के रावलपिंडी में डॉक्टर हैं। छोटा बेटा जहूर परिवार के साथ दिल्ली में रहता है। पोता इजहार दिल्ली में एक प्राइवेट एयरलाइन्स कंपनी में काम करता है। बेटी फरहत जेद्दा में रहती है। टीचर है। भाई गुलाम नवी लंदन में रहता है।

यासीन मालिक (हुर्रियत नेता)-दूसरी मुस्लिम महिलाओं के लिए इस्लामिक ड्रेस कोड का सपोर्ट करते हैं, पर पत्नी के साथ ट्रेन्डी आउटफिट में घुमते हैं। 2015 में यासीन मलिक और पत्नी मुशहाला का फोटो सोशल मीडिया पर हुआ था वायरल।

मीरवाइज उमर फारूक (हुर्रियत नेता)-अमेरिकी मूल की मुस्लिम शीबा मसदी से शादी की है। एक बेटी है, जो मां के साथ अमेरिका में ही रहती है। बहन राबिया फारूक अमेरिका में डॉक्टर है।

मसरत आलम (हुर्रियत नेता)-उसके दो बेटे हैं। दोनों की उम्र कम है। वह श्रीनगर के ही एक बड़े स्कूल में पढाई करते हैं। मसरत 2008-10 में प्रदर्शनों का मास्टरमाइंड रहा है।

आसिया अंद्राबी (दुख्तरान ए मिल्लत)-आसिया अंद्राबी के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा मोहम्मद बिन कासिम मलेशिया में मौसी के साथ रहता है। मौसी वहीं नौकरी करती है। वह बैचलर ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का कोर्स कर रहा है। छोटा बेटा श्रीनगर में पढ़ाई कर रहा है। एक भतीजा पाकिस्तानी सेना में कैप्टन तथा दूसरा इस्लामाबाद यूनिवर्सिटी में नौकरी करता है।

फरीदा (दुख्तरान ए मिल्लत)-महिला अलगावादी नेता फरीदा का बेटा रूमा मकबूल साउथ अफ्रीका में डॉक्टर है। 2014 के चुनावों मे फरीदा को गिरफ्तार कर लिया गया था।