सीएसआर ढांचे की समीक्षा के लिये सरकार ने बनाई समिति

मनीष कुमार, दिल्ली (28 सितंबर): कॉर्पोरेट जगत  द्वारा खर्च किये जाने वाले सीएसआर फण्ड में अनियमितता की खबरों को लेकर केंद्र सरकार के पास की शिकायतें मिलती रही हैं। ऐसे में मोदी सरकार ने सरकार ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी यानी सीएसआर की मौजूदा नियमों की समीक्षा करने और भविष्य के लिए एक नई व्यापक नीति को लेकर रोडमैप तैयार करने के लिए कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के सचिव इंजेती श्रीनिवास की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाने का एलान किया है। इस कमिटी में सेबी चेयरमैन, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण सहित कुल11 सदस्य हैं।

ये कमिटी सीएसआर फंड के तहत जो भी काम और प्रोजेक्ट किये गए है उसका विश्लेषण करेगी साथ ही तकनीक के जरिये सीएसआर फंड से होने वाले काम की मॉनिटरिंग की रूप रेखा भी तैयार करेगी। 2016-17 तक 38000 करोड़ रुपये सीएसआर फंड से जुटाये गए जिसके 2019 तक 50000 करोड़ रूपये पहुँचने का अनुमान है। जुटाए जाने का अनुमान है।

गौरतलब है कि कंपनियों के मुनाफे का 2 फीसदी के बराबर का रकम सीएसआर फंड के तहत खर्च किये जाने का प्रावधान है। कंपनियां सीएसआर फंड को शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छ्ता पर खर्च करती है।  लेकिन कंपनी मामलों के मंत्रालय को कई कंपनियों द्वारा सीएसआर फंड के नहीं खर्च किये जाने की शिकायत मिली है। तो कंपनियों द्वारा एनजीओ को भी सीएसआर फंड का पैसा दिए जाने के शिकायत मिली है। जिसके बाद सरकार ने नए सिरे से सीएसआर के नियमों के समीक्षा करने का फैसला लिया है।  11 सदस्यीय यह कमिटी अपनी पहली बैठक के 3 महीने में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।