जांच के नाम पर पैथ लैब-अस्पताल नहीं कर पाएंगे मनमानी, रेट होगा फिक्स

नई दिल्ली (11 मई): अब अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर जांच के नाम पर मरीजों से मनमानी रकम नहीं वसूल सकेंगे। स्टेंट और दवाओं की कीमतें निर्धारित करने के बाद अब सरकार मेडिकल जांच और अस्पतालों में होने वाले प्रोसीजर की कीमतें तय करने की तैयारी में है। इसके तहत गली मुहल्ले की क्लिनिक से लेकर 5 स्टार अस्पतालों में तक में मेडिकल जांच की कीमत तय होगी। साथ ही अस्पतालों में प्रोसीजर या सर्जरी की भी कीमतें तय होगी। सरकार की इस कवायद के बाद अस्पताल प्रोसिजरल चार्ज के नाम मरीजों से लूट नहीं कर पाएंगे।


स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस सिलसिले में राज्यों को चिट्ठी लिखकर जांच और प्रोसीजर की न्यूनतम और अधिकतम कीमत बताने को कहा है। राज्यों का जवाब आने के बाद केंद्र सरकार न्यूनतम और अधिकतम रेट फिक्स करेगी। कीमत तय करेगी। वहीं सरकार ने मेडिकल जांच के न्यूनतम मानक तय कर दिए हैं। जांच केंद्रों को 3 कैटेगरी में बांटा गया है। बेसिक, मीडियम और अडवांस कैटेगरी में बांटा गया है। इसके तहत तकनीकी कर्मचारी की संख्या, इंफ्रास्ट्रक्चर और जांच मशीन का स्तर निर्धारित किया जाएगा। साथ ही हर जांच केंद्र को की गयी जांच का ब्यौरा रखना होगा और ब्यौरे से अनावश्यक जांचों पर लगाम लगेगी।


सरकार ने मेडिकल जांच के न्यूनतम मानक तय करने को लेकर ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के दायरे में आने वाले सभी चिकित्सा इकाईयों को सरकार का आदेश मनना होगा। इसी कड़ी के अगले चरण में जांच और प्रोसीजर की कीमत तय होगी।