"अडाणी पोर्ट का जुर्माना रद्द नहीं बल्कि बढ़ाया गया"

नई दिल्ली (4 जुलाई): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी कहे जाने वाले गौतम अडाणी की कंपनी अडाणी पोर्ट एंड सेज लि.(एपीसेज) पर लगाया गया 200 करोड़ रुपये का जुर्माना रद्द करने संबंधी खबर को सरकार ने खारिज किया है। सरकार ने कहा है कि उल्टे कंपनी पर पहले से ज्यादा गंभीर जिम्मेदारी थोपी गयी है।

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी पर यह जुर्माना मुंदड़ा बंदरगाह के निर्माण के दौरान पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए लगाया गया था। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दावा कि कंपनी पर जुर्माना रद्द करने संबंधी खबरें गलत हैं जबकि ‘कंपनी पर और अधिक गंभीर’ दायित्व डाला गया है जिसकी लागत की कोई सीमा नहीं है। यूपीए सरकार ने 2013 में कंपनी पर गुजरात में मुंदड़ा बंदरगाह के निर्माण के दौरान पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए 200 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। खबरों में कहा गया है कि मौजूदा मोदी सरकार ने इस जुर्माने को रद्द कर दिया है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि मीडिया की रिपोर्ट में जो निष्कर्ष निकाला गया है, वह सही नहीं है। मौजूदा सरकार ने 200 करोड़ रुपए का जुर्माना रद्द नहीं किया है। मंत्रालय का निर्णय उससे 200 करोड़ रुपए मांगने से अधिक सख्त है क्योंकि इस मामले में सुनीता नारायण समिति ने नुकसान की भरपाई करने और आगे पर्यावरण संरक्षण के लिए जो सिफारिश की है। एपीसेज को उसका पूरा बोझ उठाना पड़ेगा और यह सिर्फ 200 करोड़ रुपये तक सीमित नहीं रहेगा।