वैकल्पिक ईंधन के रूप में मेथनॉल को बढ़ावा देगी सरकार

नई दिल्ली (20 दिसंबर): नीति आयोग के सदस्य वी के सारस्वत ने मंगलवार कहा कि पंजाब और हरियाणा में खेतों में हर साल पराली जलाई जाती है जिससे प्रदूषण होता है लेकिन अब जलने वाली पराली से मेथानॉल बनाया जाएगा। इसके अलावा जिन बड़े-बड़े शहरों में लैंडफिल साइटों पर कचरा जमा हो रहा है उससे भी मेथानॉल बनाया जाएगा। इसकी शुरुआत सबसे पहले दिल्ली से होगी।

सारस्वत ने संवादाताओं से कहा कि खेतों में पराली जलाए जाने से रोकने के लिए मोबाइल मेथानॉल जनरेशन प्लांट्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इन प्लांट्स की मदद से मेथानॉल बनायी जा सकेगी जिसका इस्तेमाल स्थानीय किसान डीजी सैट के लिए कर सकेंगे।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ के प्रमुख रहे सारस्वत ने कहा कि आयोग जल्द ही 'मिशन- मेथनॉल इकोनामी इंडिया' के लिए एक रोडमैप को मंजूरी देने के लिए एक प्रस्ताव कैबिनेट के पास भेजेगा। उन्होंने चार-पांच हजार करोड़ रुपये का मेथनॉल इकोनामी फंड बनाने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि वह सरकार से आग्रह करेंगे कि देश में व्यापक स्तर पर मेथनॉल के शोध और उत्पादन क्षमता के विकास के लिए धन आवंटित किया जाए।

उन्होंने कहा कि भारत में मेथनॉल का इस्तेमाल बढ़ाकर पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है। इससे भारी भरकम विदेशी मुद्रा भी बचेगी। सारस्वत ने कहा कि आगे चलकर सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में भी मेथानॉल ईधन के इस्तेमाल को बढ़ाया देगी क्योंकि यह प्रदूषणरहित ईधन है।