33 साल बाद वरिष्ठता को नजरअंदाज कर नए आर्मी चीफ की नियुक्ति

नई दिल्ली(18 दिसंबर): आर्मी चीफ की नियुक्ति के मामले में सरकार ने 33 साल बाद वरिष्ठता को नजरअंदाज किया है। आर्मी में सबसे सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी पर सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को तरजीह दी है। आम तौर पर सेनाओं के प्रमुखों की नियुक्ति की घोषणा दो से तीन महीने पहले होती थी, लेकिन पहली बार यह काम महज 14 दिन पहले किया गया है।

- जनरल दलबीर सिंह सुहाग के बाद पूर्वी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी को आर्मी में सबसे सीनियर होने के नाते आर्मी चीफ पद का अगला दावेदार माना जा रहा था।

- 1983 में लेफ्टिनेंट जनरल एस.के. सिन्हा के बाद आर्मी में नए चीफ के लिए वरिष्ठता को प्रमुखता दी गई है। लेफ्टिनेंट जनरल एस.के. सिन्हा ने इस्तीफा दे दिया था।

- इस बार रक्षा मंत्रालय की ओर से बार-बार संकेत दिए गए थे कि सिर्फ वरिष्ठता आधार न हो। बिपिन रावत ले. ज. बख्शी से जूनियर तो हैं हीं, दक्षिणी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनलर पीएम हैरिज से भी जूनियर हैं। हालांकि बिपिन रावत ने 1 सितंबर को वाइस चीफ का कार्य भार संभाला था, जिससे वह आर्मी चीफ की रेस में प्रबल दावेदार माने जा रहे थे।

- ऊंचाई वाले इलाकों में अभियान चलाने और उग्रवाद से निपटने का उन्हें खासा अनुभव है। उनकी नियुक्ति चीन से लगे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल और कश्मीर में रह चुकी है।