दवाओं की कीमत होगी सस्ती

नई दिल्ली ( 18 अगस्त ): सरकार ने सभी को किफायती दर पर दवाएं मुहैया कराने के लिए नई दवा नीति तैयार की है। सरकार अब दवाइयों को सस्ती करने कि दिशा में काम कर रही है। इसके लिए सरकार ने नई दवा नीति बनाने का फैसला लिया है। इसके मुताबिक सरकार सभी दवाओं के लिए एक निश्चित व्यापार मार्जिन भी तय करेगी। एक रिपोर्ट के अनुसार अनुचित व्यापार मार्जिन और विभिन्न स्टॉकिस्टों, डिस्ट्रिब्यूटरों और रिटेलरों द्वारा की जाने वाली बोनस की पेशकश से दवा उद्योग और उपभोक्ता बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।  

इस उद्योग से जुड़े सभी पक्षकारों के साथ व्यापक सलाह मशविरे के बाद व्यापार मार्जिन तय किया जाएगा। इससे सभी को समान अवसर उपलब्ध होंगे और साथ ही कीमतों में भी कमी आएगी। मसौदे में यह भी कहा गया है कि सीधे दवा कंपनियों से खरीद करने वाले संस्थानों पर भी यह नियम लागू होगा। 

दवा नीति में देश में सक्रिय कंपनियों के लिए मार्केटिंग के स्वैच्छिक कोड को अनिवार्य बनाने की भी बात कही गई है। इसके मसौदे में कहा गया है, 'डॉक्टरों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर उन्हें एक खास ब्रांड की दवा लिखने को कहा जाता है। सम्मेलनों के नाम पर उनके आनेजाने का खर्च वहन किया जाता है। दवा के प्रचार पर पाबंदी है लेकिन सम्मेलनों की आड़ में कानून की धज्जियां उड़ाई जाती है। इससे दवा की कीमत बढ़ जाती है।'

सरकार की योजना दवाओं की ब्रांडिंग के लिए नियम बनाने की भी है। मसौदे के मुताबिक कंपनियों को केवल तय खुराक वाली दवाओं पर ही अपने ब्रांड का नाम लिखने की अनुमति होगी। दूसरी दवाओं पर केवल दवा का जेनेरिक नाम लिखने की इजाजत होगी। ई-प्रिस्क्रिप्शन शुरू करने का भी प्रस्ताव है जिससे डॉक्टर बिना किसी परेशानी के जेनेरिक दवा लिख सकेंगे। बिना संयोजन वाली दवाओं पर कंपनियां पैकेट पर केवल स्टांप लगा सकती हैं।

इसके अलावा एनपीपीए ढांचे में बदलाव कर इसमें दवा उद्योग और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सकता है। दवा उद्योग लंबे समय से इसकी मांग कर रहा है। अलबत्ता दवाओं की कीमत के निर्धारण का अंतिम अधिकार एनपीपीए के हाथों में ही रहेगा। प्राधिकरण बिना पेटेंट वाली दवाओं की कीमतों का ही निर्धारण करेगा।