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PMC बैंक घोटाले के बाद सरकार सचेत, कॉपरेटिव बैंक के नियमों में RBI करेगा बदलाव

पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC BANK) घोटाले के बाद सरकार (Government) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हरकत में है। पीसीएम बैंक घोटाले से सबक लेते हुए आरबीआई ने कॉपरेटिव बैंक (Urban Cooperative Banks) के नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रहा है।

आरबीआई

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (6 दिसंबर): पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव  बैंक (PMC BANK) घोटाले के बाद सरकार (Government) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हरकत में है। पीसीएम बैंक घोटाले से सबक लेते हुए RBI ने कॉपरेटिव बैंक (Urban Cooperative Banks) के नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रहा है। जानकारी के मुताबिक इस सिलसिले में RBI ने एक प्रस्ताव भी रखा है। जानकारी के मुताबिक RBI के इस प्रस्ताव में 500 करोड़ रुपए और इससे अधिक की संपत्ति वाले सभी शहरी कॉपरेटिव बैंकों (Urban Cooperative Banks) को सीआरआईएलसी रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क के दायरे में लाना भी शामिल है।

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आरबीआई (RBI Governor) के गवर्नर शक्तिकांत दास गुरुवार को मौद्रिक समीक्षा की घोषणा के बाद कहा कि सहकारी बैंक (Urban Cooperative Banks) की ऐसी संपत्तियों का मूल्य निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका मौद्रिकरण किया जा सकता है। रिजर्व बैंक (RBI) ने सहकारी बैंक (Urban Cooperative Banks) क्षेत्र के बेहतर तरीके से नियमन को नियमनों में बदलाव के बारे में भी सुझाव दिए हैं। आरबीआई के स्टेटमेंट ऑन डेवलपमेंटल एंड रेगुलेटरी पॉलिसीज के मुताबिक आरबीआई ने सूचीबद्ध वाणिज्यिक बैंकों, सभी भारतीय वित्तीय संस्थानों और कुछ गैर-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) का एक सेंट्रल रिपॉजिटरी ऑफ इन्फोर्मेशन ऑन लार्ज क्रेडिट्स (सीआरआईएलसी) तैयार किया है। सीआरआईएलसी बनाने के कई मकसद हैं। इनमें ऑफसाइट सुपरविजन का मजबूत करना और वित्तीय तनाव की समय रहते पहचान करना भी शामिल है। आरबीआई (RBI) ने इस स्टेटमेंट में कहा कि प्राथमिक शहरी कॉपरेटिव बैंकों द्वारा दिए गए बड़े कर्जों का ऐसा ही एक डाटाबेस बनाने के नजरिए से उसने 500 करोड़ रुपए व इससे अधिक के ऐसे संस्थानों को सीआरआईएलसी के रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क के तहत लाने का फैसला किया है। इस बारे में विस्तृत निर्देश इस महीने के आखिर में आएगा।

Reserve Bank of India

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक (RBI) ने 23 सितंबर को पीएमसी बैंक में प्रशासक नियुक्त करते हुये ग्राहकों द्वारा नकदी की निकासी की भी सीमा तय की थी। उसके बाद से निकासी की सीमा में कई बार बदलाव किया गया है। आरबीआई गर्वनर शक्तिकांत दास ने कहा  कि 'अभी फॉरेंसिक आडिट चल रहा है। हमें इस महीने के अंत तक यह रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। बैंक की संपत्तियों का हासिल किया जाने वाला मूल्य निकालने का भी प्रयास किया जा रहा है।' साथ ही उन्होंने कहा कि पेशेवर मूल्यांकक पीएमसी की संपत्तियों के मूल्यांकन में मदद कर रहे हैं। अलग से रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त प्रशासक और विधि प्रवर्तन प्राधिकरणों मसलन शहर की पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा, प्रवर्तन निदेशालय और रिजर्व बैंक के अधिकारियों के बीच संपत्ति के मूल्यांकन को संयोजन की व्यवस्था बनाई गई है। शशिकांत दास ने कहा कि एक बार हमें फॉरेंसिक आडिट रिपोर्ट मिलने और संपत्तियों के मूल्य का अंतिम आंकड़ा मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

(Image Credit: Google)

 


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