मोबाइल-वॉलेट यूजर्स का बीमा करेगी सरकार, धोखा होने पर मिलेगा पैसा

नई दिल्ली (13 फरवरी): नोटबंदी के बाद सरकार देशभर में कैशलेश इकोनॉमी को बढ़ावा दे रही है। सरकार लोगों को डिजिटल ट्रांजेक्शन अपनाने के लिए प्रोत्साहित भी कर रही है। डिजिटल लेनदेन में डेबिट, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग से लेकर मोबाइल वॉलट जैसी सर्विसेज हैं। हालांकि डिजिटल लेनदेन में हैकिंग और धोखाधडी का भी डर रहता है जिसकी वजह से कई यूजर्स इनका उपयोग करने से बचते हैं। लेकिन अब चिंता की कोई नहीं क्योंकि सरकार आपके मोबाइल वॉलेट में रखे पैसे का बीमा करने जा रही है। इसकी वजह से आपके मोबाइल में रखे पैसे किसी के द्वारा चुरा लेने या धोखाधडी होने पर आपको पैसा वापस मिल जाएगा। यह बीमा पॉलिसी लाने के लिए सूचना तकनीक मंत्रालय नियमों का मसौदा जारी करने की तैयारी कर रही और जल्द ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

गौरतलब है कि नोटबंदी से पहले ही पेटीएम और मोबीक्विक जैसी कंपनियां मोबाइल वॉलेट की शुरुआत कर चुकी थी। लेकिन 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद इनके कारोबार में जबरदस्त बढ़त देखने को मिली है। रिजर्व बैंक के मुताबिक सितंबर 2016 में मोबाइल वॉलेट के जरिए 7 करोड़ 53 लाख लेन-देन किया गया जिनकी कीमत 3192 करोड़ रुपए थी। इसके बाद नवंबर में लेन-देन की संख्या 13 करोड़ 80 लाख पहुंची गई थी जिसकी कीमत 3305 करोड़ रुपए थी। वहीं, दिसंबर में मोबाइल वॉलेट से लेन-देन की संख्या 21 करोड़ 31 लाख पर पहुंच गयी जिसकी कीमत 7448 करोड़ रुपए थी।

मोबाइल वॉलेट यूजर्स की संख्या बढ़ने के साथ ही उनमें धोखाधड़ी यानी बगैर जानकारी के पैसे निकाल लेने की शिकायतें भी बढ़ी हैं। लेकिन अब ऐसी ही शिकायतों के निबटारे के लिए सूचना तकनीक मंत्रालय आम चर्चा के लिए नए नियमों का मसौदा जारी करने जा रहा है। कानून और सूचना तकनीक मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि ग्राहकों के हितों और सुरक्षा के लिए नियमों का ड्राफ्ट जल्द ही पब्लिक डोमेन में रखा जाएगा। इस पर आम राय बनने के बाद अंतिम रुप दे दिया जाएगा।