सरकार ने की हज नीति में सुधार के लिए 6 सदस्यीय कमेटी गठित

नई दिल्ली ( 5 फरवरी ): केंद्र सरकार ने देश की हज नीति में सुधार के लिए एक छह सदस्यीय कमेटी गठित की है। यह कमेटी वर्ष 2012 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में हज की सब्सिडी को धीरे-धीरे कम करने और वर्ष 2022 तक इसे पूरी तरह खत्म करने पर भी अपनी रिपोर्ट देगी। अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मुख्तार अब्बास नकवी ने शनिवार को बताया कि जेद्दाह में भारत के पूर्व महावाणिज्य दूतावास अफजल अमानुतुल्लाह को इस उच्च स्तरीय कमेटी का संयोजक नियुक्त किया गया है।

बांबे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज एसएस पार्कर, हज कमेटी के पूर्व अध्यक्ष कैसर शमीम, एयर इंडिया के पूर्व मुख्य प्रबंध निदेशक मिशेल मासकरेंहस और मुस्लिम विद्वान चार्टड एकाउंटेंट कमल फारुकी भी इस कमेटी का हिस्सा होंगे। मंत्रालय के संयुक्त सचिव जे.आलम इस कमेटी के सदस्य सचिव होंगे।

यह कमेटी अन्य सदस्यों के साथ इस बात पर भी विचार करेगी कि क्या सब्सिडी न होने पर क्या भारतीय हज यात्री कम खर्च पर सऊदी अरब जा सकेंगे। नकवी ने कहा कि विशेषज्ञ कमेटी का गठन हो गया है और वह इस विषय में एक या दो महीने में अपनी रिपोर्ट दे देगी।

ताकि यह तय किया जा सके कि भारतीय हज नीति को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। किस तरह से हज यात्रियों को अधिकतम छूट दी जा सकती है और कैसे हज का बेहतर प्रबंधन हो सकता है। उन्होंने कहा कि कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार करने और सौंपने से पहले इस बारे में हरेक पक्ष से राय-मशविरा करेगी।

सूत्रों का कहना है कि कमेटी हज की मौजूदा नीति पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को देखते हुए बेहतरीन संशोधनों के उपाय करेगी। ये कमेटी भारतीय हज कमेटी के हज यात्रियों के प्रबंधन, रहने और हवाई यात्रा के इंतजाम के प्रभाव की भी समीक्षा करेगी। वह इस क्षेत्र में हज यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निजी टूर ऑपरेटरों को भी लाने पर विचार करेंगे।

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने सऊदी अरब ने भारत के सालाना हज कोटे में अब तक का सबसे अधिक इजाफा किया था। यह हज कोटा 34,500 हज यात्री बढ़ाकर इसे 1,36,020 से लेकर 1,70,520 हज यात्री कर दिया गया था। सनद रहे कि वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को धीरे-धीरे हज सब्सिडी कम कर इसे वर्ष 2022 तक खत्म करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि हर साल हज सब्सिडी के रूप में खर्च किए जाने वाले 650 करोड़ रुपये को सरकार इस समुदाय के सामाजिक विकास के कार्यों में लगाए।