मोदी सरकार ने पॉक्सो एक्ट में किया बड़ा बदलाव, अब मिलेगी मौत की सजा


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (28 दिसंबर): केंद्र सरकार ने पॉक्सो एक्ट यानी प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट में बड़ा बदलाव किया है। केंद्र सराकर ने पास्को में बड़ा बदलाव करते हुए बच्चों को सेक्सुअल अपराधों से बचाने के लिए इसके मौजूदा कानून में बदलाव करते हुए इसके कानून को और सख्त करने का फैसला किया है। इसके तहत अब मौत की सजा तक का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद नाबालिगों के साथ यौन शोषण की घिनौनी हरकतों को अंजाम देने वाले लोग अब फांसी के फंदे से नहीं बच सकेंगे।


केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि कैबिनेट ने दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत मौत की सजा को मंजूरी दे दी है।  इस साल की शुरूआत में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने नाबालिग बच्चों पर होने वाले यौन अपराधों पर लगाम लगाने के लिए एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव रखा था। यह एक्ट बच्चों को पोर्नोग्राफी, सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है।



साल 2012 में बनाए गए इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई। जिसका कड़ाई से पालन किया जाना भी सुनिश्चित किया गया है। इस अधिनियम की धारा 4 के तहत वो मामले शामिल किए जाते हैं जिनमें बच्चे के साथ दुष्कर्म या कुकर्म किया गया हो। इसमें सात साल सजा से लेकर उम्रकैद और अर्थदंड भी लगाया जा सकता है। पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के अधीन वे मामले लाए जाते हैं जिनमें बच्चों को दुष्कर्म या कुकर्म के बाद गम्भीर चोट पहुंचाई गई हो। इसमें दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसी प्रकार पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत वो मामले पंजीकृत किए जाते हैं जिनमें बच्चों के गुप्तांग से छेडछाड़ की जाती है. इसके धारा के आरोपियों पर दोष सिद्ध हो जाने पर पांच से सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।