इस काल में करोगे गोवर्धन पूजा तो हो जाओगे मालामाल !


नई दिल्ली (20 अक्टूबर): कार्तिक माह की प्रतिपदा यानी आज मनाये जाने पर्व को गोवर्धन या अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है। आज के दिन विभिन्न प्रकार की सामग्री बनाकर भगवान को 56 भोग लगाए जाते हैं। खरीफ फसलों से प्राप्त अनाज के पकवान और सब्जियां बनाकर भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा कर ब्रजवासियों की भारी बारिश से रक्षा की थी। ऐसा करके श्रीकृष्‍ण ने इंद्र के अहंकार को भी चूर-चूर किया था।

गोवर्धन पूजा का श्रेष्ठ समय प्रदोष काल में माना गया है। आज लोग अपने घरों में गाय के गोबर से गोबर्धन बनाते हैं। इसका खास महत्व होता है। गोबर्धन तैयार करने के बाद उसे फूलों से सजाया जाता है। शाम के समय इसकी पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, दूध नैवेद्य, जल, फल, खील, बताशे आदि का इस्तेमाल किया जाता है। कहा जाता है कि आज के दिन मथुरा में स्थित गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन लोग घरों में प्रतीकात्मक तौर पर गोवर्धन बनाकर उसकी पूजा करते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं। व्यापारी लोग अपनी दुकानों, औजारों और बहीखातों की भी पूजा करते हैं। जिन लोगों का लौहे का काम होता है वो विशेषकर इस दिन पूजा करते हैं और इस दिन कोई काम नहीं करते हैं।