जानें कैसे युवाओं को बीमार बना रहा है गूगल

अविनाश पांडे, नई दिल्‍ली (21 जनवरी): हाथ में मोबाइल हो या सामने लैपटॉप या डेस्कटॉप। देश के बच्चे हों, बूढ़ें हों या जवान वो गूगल के जरिए दुनिया को समझने लगते हैं। खाने के लिए रेस्टोरेंट के बारे में जानना हो या ऑनलाइन शॉपिंग करनी हो। कोई खबर पढ़नी हो या किसी शख्सियत के बारे में जानकारी जुटानी हो गूगल पर उंगलियां थिरकनी शुरु हो जाती हैं। लेकिन यही गूगल आपको बीमार, बहुत बीमार बना सकता है।

गूगलग्रस्त युवाओं को ये खबर देखना बेहद जरूरी है। मुंबई के एक 35 साल के युवक को हर बात पर गूगल सर्च इंजन खंगालने की आदत ने इन्हें सायबर कॉन्ड्रिया का शिकार बना दिया। ये तो समझ आता है कि साइबरकॉड्रिया नाम की ये बीमारी ज्यादा से ज्यादा कंप्यूटर पर जानकारी जुटाने से जुड़ी हुई है। लेकिन इस बीमारी का लक्षण और भी खतरनाक है।

मुंबई के इस युवा को पेट से जुड़ी बीमारी हुई। मामूली बीमारी के बारे में लक्षण लिखकर ये नौजवान नेट पर उसके बारे में जानकारी जुटाने लगा। छोटी सी बीमारी के सौ से ज्यादा रिजल्ट आए और उन रिजल्ट में जो सबसे घातक बीमारी जैसे कैंसर के बारे में पता चला तो इस नौजवान ने मान लिया कि इसे कैंसर ही हुआ है और यही है साइबरकॉन्ड़्रिया बीमारी का सबसे बड़ा लक्षण।

आईटी सेक्टर में काम करने वाला मुंबई का ये नौजवान एक डॉक्टर से दूसरे डॉक्टर को दिखा रहा था। हर जगह रिपोर्ट नॉर्मल आ रही थी। लेकिन इंटरनेट पर बार-बार अपने सामान्य लक्षणों को देखकर ही उसका सबसे भयानक बीमारी से कनेक्शन निकाल लिया। आखिरकार इस नौजवान की असली बीमारी एक डॉक्टर ने पकड़ी और मनोचिकिस्क सागरा मुंदड़ा के पास भेजा। जिन्हें समझने में देर नहीं लगी कि ये नौजवान साइबरकॉन्ड्रिया का शिकार है।

इस नौजवान की काउंसलिंग पिछले चार महीनों से चल रही है। धीरे-धीरे इसके मन में बैठाया जा रहा है कि इंटरनेट पर किसी बीमारी के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने से इसके मन में घर कर गया है कि ये उसी बीमारी का शिकार है। जरूरत है कि आप भी सावधानी बरतें। सर्च इंजन हमारी मदद के लिए बने हैं, हमें बीमार बनाने के लिए नहीं।