किसी के तन पर लंगौटी भी नहीं और कोई पहनता है 3 करोड़ का सोना, नाम है 'गोल्डन बाबा'

नई दिल्ली (18 जनवरी): प्रयाग का संगम तट हो या हरिद्वार का पावन गंगा का किनारा भारतीय संस्कृति और सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत समागम यहां देखने को मिलता है। भांति-भांति के साधु सन्यांसी और औघड़ बैरागी अलग-अलग वेश-भूषा में दिखायी देते हैं। कुछ के शरीर बिलकुल नंग-धड़ंग, लंगोटी भी नहीं होती और कुछ ऐसे जो ऊपर से लेकर नीचे तक सोने से लदे रहते हैं।

 ऐसे ही एक गोल्डन बाबा हरिद्वार अर्धकुम्भ में विराजमान हुए । लगभग 15 किलो सोने के आभूषँणों के साथ बाबा गंगा में डबुकी लगाने पहुंचे तो हजारों-हजार लोग सब कुछ भूल कर बस उन्हें देखने लगे। घाट पर जब इन संन्यासी ने चेलों समेत डुबकी लगाई तो सभी की आंखें उनकी ओर ही थी। बाबा के आभषूणों से लदे होने के मामले में जब उनके शिष्यों से सवाल किया गया तो शिष्यों ने तपाक से उत्तर देते हुए कहा, जिस तरह सोना कीमती और अमूल्य वस्तु है उसी तरह से हमारे गुरु भी स्वर्णाभूषण से सुशोभित और विभूषित हैं जो उनके व्यक्तित्व के अनुकूल ही है और वे शोभायमान हैं।

संन्यास लेने के पहले बाबा का नाम सुधीर कुमार मक्कड़ था। दिल्ली में उनके जेवरातों का व्यापार था। बहुत कुरेदने पर बाबा ने कहा कि व्यापार में लिप्त रहने के चलते कुछ अपराध हो ही जाते थे। इन अपराधों से छुटकारा पाने के लिए आस्तिक बन गया।