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सफल-सुरक्षित वैवाहिक जीवन का वरदान देती है मां महागौरी

नई दिल्ली (9 अक्टूबर): यूं तो नवरात्रि के दसों दिन कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने का विधान है परंतु अष्टमी के दिन का विशेष महत्व है। महागौरी को प्रसन्न करने के लिए पंचोपचार सहित पूजा करें और दोनों हाथ जोड़कर 'सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि, सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी' इस मंत्र का उच्चारण करें। शास्त्रों में कहा गया है कि सस्वर उच्चारण तभी उचित है जब एकांत हो, और कोई आस-पास न हो। इसलिए मंत्र का उच्चारण मन ही मन में किया जाये। किसी को सुनाई न दे। नवरात्र के आठवें दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए मां महागौरी को चुनरी भेंट करती हैं। देवी गौरी  की पूजा का विधान सामान्य ही है अर्थात जिस तरह सप्तमी तिथि तक  मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की है उसी प्रकार अष्टमी के स्वरूप की भी पूजा की जानी चाहिए। 


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