हैरान करने वाला है इस लड़की का काम

लखनऊ (13 जुलाई): 12 जुलाई का दिन वर्ल्ड में मलाला-डे के रूप में ऑब्जर्व किया जाता है। पाक की मलाला को लड़कियों की एजुकेशन पर लिखने के लिए तालिबान ने सिर में गोली मार दी थी। ऐसी ही कुछ कहानी मेरठ के चंदौरा गांव की रहने वाली जैनब खान की है।

- जैनब ने गोली नहीं खाई, लेकिन उन्होंने अपनी एजुकेशन को लेकर मलाला जैसा ही संघर्ष किया। - राजपूत डॉमिनेटेड गांव चंदौरा में लड़कियों को बचपन से ही फैक्ट्री में मजदूरी के लिए भेज दिया जाता है। - इसी गांव की जैनब को भी बचपन से ही फुटबॉल सिलने के पेशे में लगाया गया था। - नन्ही जैनब खेलने की उम्र में फुटबॉल सिलकर अपने परिवार का पेट पालने में मदद करती थी। - जैनब पढ़ने का शौकीन थी। लेकिन गांव में अधिकतर लड़कियां 8वीं क्लास के बाद पढ़ाई बंद कर देती थीं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह सीनियर स्कूल का खतरनाक रास्ता थी। - जैनब लगातार अपने पेरेंट्स से सीनियर स्कूल भेजने की बात कहती थी। उसकी जिद थी 12वीं तक स्कूल पढ़ने की। - जैनब के पिता ने उसका सपोर्ट किया और रोज उसे छोड़ने और लेने जाने का जिम्मा उठाया। - जैनब के 8 भाई-बहन हैं, जिनमें से 3 बहने हैं। - सभी बहनों में 12वीं तक स्कूल पढ़ने वाली जैनब पहली रहीं। - जैनब ने हाल ही में ग्रैजुएशन पूरा किया है।

मिसाल बन चुकी है जैनब - पहली बार हाईस्कूल की परीक्षा देने के बाद जैनब ने ठान लिया था कि वह गांव की लड़कियों को आगे की पढ़ाई के लिए मजबूर करेगी। - वो घर-घर जाकर उन सभी लड़कियों के मां-बाप से मिलती है, जो बेटी को कक्षा 8 से आगे पढ़ाना नहीं चाहते। - यह जैनब की मेहनत का नतीजा है कि इस समय गांव की लड़कियां हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई कर रही हैं। - उन्होंने अपने घर पर ही गरीब बच्चों को बिना फीस लिए ट्यूशन देने का काम शुरू किया है।