''प्रधानमंत्री जी मैं मरना नहीं पढ़ना चाहती हूं''

बसंत मिश्रा, सीतापुर (4 सितंबर): अटरिया थाना क्षेत्र के बेरसापुर निवासी दिनेश कुमार पांडेय लखनऊ के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में चौकीदारी करके परिवार की जीविका चलाते थे। दिनेश की दो बेटियां शची व नेहा पढ़ने में अव्वल थीं। तीन मार्च 2015 को सड़क हादसे में दिनेश की मृत्यु हो गई तो परिवार टूट सा गया।

दादा राम सरन पांडेय ने शची की मां उर्मिला पांडेय को खाने-पीने का सामान देना बंद कर दिया। इतना ही नहीं पैतृक 18 बीघा जमीन देने से मना कर दिया। जुल्म ऐसे कि दिनेश द्वारा लगवाए गए यूकेलिप्टस के पेड़ काटकर बेच डाले और जमीन पर बैंक से कर्ज ले लिया, जिससे जमीन बिक न सके।

इंटरमीडिएट परीक्षा 2016 में 91 फीसद अंक पाने वाली शची का परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा तो नाना राम आसरे अपने घर ले आए। इंजीनियर बनने का उसका ख्वाब उस वक्त हिचकोले लेने लगा जब शची के पास बीएससी में दाखिले के लिए पैसे का इंतजाम नहीं हो सका। संदना के एक निजी कॉलेज में हाईस्कूल में पढ़ रही उसकी छोटी बहन निधि को फीस के पैसे जमा ना कर पाने के कारण कक्षा में खड़ा करके शिक्षक जलील करते हैं। हर तरफ से निराश शची ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव को मार्मिक पत्र लिखा है।

पत्र में शची ने लिखा,

''प्रधानमंत्री जी अंतिम उम्मीद के साथ मैं आपसे गुजारिश कर रही हूं कि प्लीज मेरी मदद कीजिए। मेरी मां हम बहनों के साथ खुदकशी करने की बात करती हैं, लेकिन मैं मरना नहीं चाहती हूं। पढ़-लिखकर मैं इंजीनियर बन देश की सेवा करना चाहती हूं और छोटी बहन को आइएएस बनाना चाहती हूं। प्रधानमंत्री को मार्मिक पत्र लिखने के आलावा सीतापुर जिले की शची पांडेय ने सूबे के मुख्यमंत्री को भी ऐसा ही मार्मिक ट्वीट किया है।''

छात्रा के ट्वीट पर सीएम कार्यालय ने संज्ञान लेते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है। सूबे के मुख्यमंत्री ने फ़ौरन ही सीतापुर जिले के जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि जल्द ही शची की हर संभव मदद की जाए। जिलाधिकारी ने शची के घर पर तत्काल ही सिधौली के उप-जिलाधिकारी को स्थिति का जायजा लेने के लिए भेजा। शची को लोहिया आवास मुहैय्या करा दिया गया है, साथ ही मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से भी शची की मदद जिलाधिकारी ने कही है।