मिसाल: बाल विवाह से बचने के लिए घर छोड़ा, 12वीं में हासिल किए 90 फीसदी अंक

न्यूज 24 ब्यूरो नई दिल्ली (25 अप्रैल): एक कहावत है कि अगर आपने कुछ करने की ठानी है तो दुनिया की कोई ताकत आपको उस काम को करने को रोक नहीं सकती है। चिक्‍काबल्‍लापुर जिले के गांव कोट्टरू में रहने वाली रेखा जिसकी उम्र केवल 18 साल है, ने  हाल ही में घोषित हुए बारहवीं के रिजल्‍ट में उसके 90.3 प्रतिशत नंबर आए हैं। रेखा का सपना आईएएस अफसर बनने का है। खास बात यह है कि दो साल पहले उसकी मां ने उसपर शादी करने का दबाव डाला लेकिन रेखा को ये मंजूर नहीं था। ऐसे में जब उसे कुछ उपाय ना सूझा तो वह घर से ही भाग गई। रेखा बाल विवाह के खिलाफ थी इसलिए वह अपनी एक दोस्‍त के साथ बेंगलुरु भाग गई। यहां रेखा ने समय बर्बाद न करके हेब्‍बल में कंप्‍यूटर ट्रेनिंग सेंटर जॉइन कर लिया।

लेकिन रेखा महज कंप्‍यूटर की ट्रेनिंग से संतुष्‍ट नहीं हुई। उसने चाइल्‍ड हेल्‍पलाइन 1098 पर कॉल करके अपनी पढ़ाई आगे जारी रखने में मदद मांगी। इसके बाद चाइल्‍ड वेलफेयर कमिटी (सीडब्‍ल्‍यूसी) के सदस्‍यों ने हेब्‍बल के पीजी में आकर उससे मुलाकात की और उसे मातीकेरई के स्‍पर्श ट्रस्‍ट में रहने के लिए भेज दिया। उन्‍होंने एक सरकारी इंटरकॉलेज में दाखिला लेने में रेखा की मदद की। रेखा की दो साल की मेहनत रंग लाई जब 18 अप्रैल को 12वीं के रिजल्‍ट का ऐलान हुआ। रेखा को 600 में से 542 नंबर मिले। हिस्‍ट्री में उसके 100 नंबर आए। अब रेखा हिस्‍ट्री, इकनॉमिक्‍स और पॉलिटिकल साइंस में बीए करना चाहती है। स्‍पर्श ट्रस्‍ट के मैनेजिंग ट्रस्‍टी आर गोपीनाथ कहते हैं, 'रेखा अपने भविष्‍य को लेकर दृढ़संकल्‍प और स्‍पष्‍ट है। हमें उस पर गर्व है।

रेखा कहती है कि मैं जब छोटी थी मैंने अपने पिता को खो दिया। मैंने घर इसलिए छोड़ा क्‍योंकि मैं बाल विवाह के खिलाफ थी और आगे पढ़ना चाहती थी। अब मेरे जीवन का लक्ष्‍य एकदम साफ है। मैं पहले वकील बनूंगी और उसके बाद सिविल सर्विसेज की परीक्षा में बैठूंगी।