जूते के कारण स्कूल ने छात्र को एग्जाम देने से रोका

नई दिल्ली(29 जनवरी): जूते ज्यादा जरूरी हैं या पढ़ाई। गाजियाबाद की एक महिला ने डीएम से ये सवाल पूछा है। गाजियाबाद की महिला ने शिकायत की है जूता फटने की वजह से स्कूल ने उसके बेटे को एगजाम देने से रोक दिया और जबरन घर भेज दिया। 

गाजियाबाद के इस बच्चे को स्कूल में जूतों की वजह से ना सिर्फ जलील किया गया बल्कि परीक्षा देने से भी रोक दिया गय । जूतों में एक कट का निशान होने की वजह से स्कूल में बच्चे को दूसरे बच्चों से अलग कर लिया गया और फिर उसे घर भेज दिया गया। स्कूल ने ना तो बच्चे के मां बाप को एक दिन की मोहलत दी और ना ही बच्चे की परीक्षा देने की गुजारिश पर गौर किया। बच्चे को स्कूल की कैब में बिठाकर जबरन घर भेज दिया गया। 

बच्चे की मां ने स्कूल से एक दिन रूक जाने की गुजारिश की थी, लेकिन स्कूल प्रशासन अपनी बात पर अड़ा रहा । अब बच्चे की मां ने डीएम को चिट्ठी लिखकर सवाल पूछा है कि जूता जरूरी है या पढ़ाई। डीएम ने स्कूल के इस शर्मनाक करतूत की जांच के आदेश दिए हैं। 

गाजियाबाद का ये परिवार भी उन करोड़ों परिवार की तरह है जो अपनी जरूरतों को समेटकर बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने की हिम्मत करता है। इन दिनों नौकरी ना रहने की वजह से ये परिवार आर्थिक तंगी झेल रहा है लेकिन स्कूल की फीस वक्त पर दी जा रही है हां दूसरे जरूरी सामानों की खरीद में देरी जरूर हो रही है। 

दूसरे बच्चों की तरह ही इस बच्चे को भी ना तो अपने पिता के बैंक बैलेंस का पता है और ना ही आमदनी का, लेकिन स्कूल के रवैये से ना सिर्फ बच्चा मायूस है बल्कि मां बाप का अपने बच्चे के सामने शर्मिंदगी उठानी पड़ी । अब परिवार को डीएम से स्कूल के खिलाफ सख्त एक्शन की उम्मीद है। 

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