कहां तक जाएगी जनरल v/s जनरल की जंग...

नई दिल्ली (18 अगस्त): भले ही मोदी सरकार पर यह आरोप लगाए जाते हों कि इसमें किसी भी अधिकारी को कोई अपनी बात नहीं रखने दी जाती, लेकिन भारतीय थल सेना के अध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने जो धमाका किया है, उससे काफी कुछ बदल गया है।

दलबीर सिंह सुहाग ने एक सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ऐसा शपथ पत्र दाखिल किया है जिसमें उन्होंने खुलकर पूर्व सेना प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह पर एक बड़ा आरोप लगाया है। दलबीर सिंह ने कहा, 'साल 2012 में मुझे तब के सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने रहस्यमयी योजना, बुरी मंशा और दंड देने के मकसद से निशाना बनाया। इसका इकलौता उद्देश्य आर्मी कमांडर के रूप में मेरा प्रमोशन रोकना था।' वीके सिंह फिलहाल केंद्र सरकार में विदेश राज्यमंत्री हैं।

हालांकि इसके बाद क्या होगा और यह अभी साफ नहीं हो पाया है। लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बयान के बाद दलबीर सिंह सुहाग की उनके पद से छुट्टी भी हो सकती है। लेकिन कुछ का कहना है कि मोदी सरकार इस बात को दबाने की कोशिश करेगी, क्योंकि अगर वह इस मामले को ज्यादा तूल देती है तो दोनों तरफ से उसकी किरकिरी होगी।

अगर दलबीर सिंह को उनके पद से हटाया जाता है तो मोदी सरकार पर लगा तानाशाही का तमगा और मजबूत हो जाएगा। वहीं अगर सरकार इस मामले में जनरल वीके सिंह के खिलाफ भी कोई एक्शन नहीं लेना चा‍हती, क्योंकि पार्टी नहीं चाहेगी कि वह एक बयान के आधार पर खुद को कमजोर दिखाए।

क्यों सामने आया यह मामला... लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) रवि दस्ताने ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डालकर कहा था कि सुहाग को पक्षपात करके सेना प्रमुख बनाया गया था। इसके जवाब में सुहाग ने यह हलफनामा दिया है।

सुहाग पर थे यह आरोप... बता दें कि सुहाग के नेतृत्व वाली यूनिट पर 2012 में अप्रैल से मई के बीच पूर्वोत्तर में हत्याएं और लूटपाट का आरोप लगा था, जिस पर तत्कालीन सेना प्रमुख सिंह ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की और उनका प्रमोशन रोक दिया।