कभी थे बीपीएल कार्ड धारी, आज हजार करोड़ का मालिक है गायत्री प्रजापति

नई दिल्ली(12 सितंबर): यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने आज खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। बता दें कि अवैध खनन को लेकर गायत्री प्रजापति पर कई आरोप लग चुके हैं। सीबीआई की जांच भी चल रही है।

आइए जानते हैं कौन है गायत्री प्रजापति....

- सपा सरकार में खनन मंत्री बनते ही गायत्री प्रजापति की किस्मत ऐसी पलटी कि वह एक बीपीएल कार्ड धारक से हजार करोड़ के मालिक बन गये। 2012 के विधानसभा चुनाव चुनाव में सपा की जीत के बाद 28 जुलाई 2013 को गायत्री प्रजापति को खनन मंत्री बनाया गया। जिसके बाद उनकी संपत्ति लगातार बढ़ती गयी। 

- आज गायत्री प्रजापति के पास बीएमडब्ल्यू के साथ तमाम लग्जरी गाड़ियां और करोड़ों की अकूत संपत्ति है। गायत्री 28 जुलाई 2013 को खनन मंत्री बनने के दो साल में ही एक हजार करोड़ से ज्यादा माइनिंग माफियाओं के दम पर कमा लिया। 

- गायत्री ने मंत्री बनने के बाद खूब पैसा कमाया।

10 साल बीत गए एपीएल कार्ड पाने में

जब दिन गरीबी में बीते तो बाद में गायत्री ने प्रापर्टी डीलरों का साथ किया। धीरे-धीरे जमीनों की दलाली कर खुद प्रापर्टी डीलर का काम शुरू कर दिया। 2010 से 2011 के बीच कुछ कमाई हुई तो सपा से दूसरी बार टिकट के लिए लग गए। 2012 में अमेठी से सपा के टिकट के बाद जीत नसीब हुई तो कभी सबसे गरीब रहा यह शख्स आज अखिलेश सरकार के सबसे अमीर मंत्रियों में सबसे अव्वल है।

लोकायुक्त के ओमशंकर दि्वेदी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक अमेठी के परसांवा गांव में 2002 में गायत्री प्रसाद प्रजापति को बीपीएल कार्ड जारी हुआ। इसके बाद 2012 में जब विधायक बने तो गरीबी रेखा से ऊपर वाला एपीएल कार्ड मिला।

2012 में सपा के टिकट पर अमेठी से विधायकी का चुनाव लड़ने के दौरान गायत्री ने तब 1.81 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। जब मुलायम के बेटे प्रतीक को कमवाकर आत्मनिर्भर किया तो मुलायम गदगद हो गए। बस मुलायम कुनबे से नजदीकियां बढ़ी तो 28 जुलाई 2013 को मुलायम के कहने पर अखिलेश ने गायत्री को खनन मंत्री बना दिया।

बस फिर शुरू हो गया नदियों के किनारे रेत से सोना पैदा करने का खेल। सोशल एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर की ओर से लोकायुक्त के यहां दाखिल शिकायत के मुताबकि मंत्री बनने के दो साल के भीतर ही 942.5 करोड़ गायत्री की संपत्ति हो गई। हालांकि खुद के बचाव के लिए मंत्री ने करीबियों के नाम से संपत्तियां खरीदीं।