11 साल बाद इस रेप पीड़िता को मिला इंसाफ

मानस श्रीवास्तव, लखनऊ (18 अप्रैल): 11 साल बाद वो वक्त आ ही गया जब लखनऊ के सबसे दर्दनाक बलात्कार कांड मामले में मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला को अदालत ने उसके किया की सज़ा सुनाते हुए दस साल की सज़ा सुनाई है। इससे पहले लखऩऊ की जिला अदालत गौरव शुक्ला को दोषी मानते हुए उसे जेल भेज चुकी थी। आज गौरव को जेल से अदालत लाया गया, जहां अदालत ने उसे दस साल की सजा सुना दी।

एक बेबस लड़की, 5 दरिंदे और हवस की घिनौनी वारदात। 10 साल 11 महीने और 16 दिन बाद लखनऊ के बहुचर्चित आशियाना गैंगरेप केस में बड़ा फैसला आ गया और मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला को 10 साल की कैद और 10 हज़ार रुपए जुर्माने की सजा मि‍ली है। उसे ये सजा पीड़ि‍ता के बयान पर दी गई है, क्योंकि कोर्ट को इस मामले में कोई सबूत नहीं मि‍ले हैं।

आपको बता दें कि पिछले बुधवार को ही फास्ट ट्रैक कोर्ट के एड‍शिनल सेशन जज अनिल कुमार शुक्ला ने 11 साल पहले हुए इस कांड के लि‍ए गौरव शुक्ला को दोषी करार दि‍या था, जिस पर सोमवार को सजा सुना दी गई। हालांकि पीड़ित परिवार कोर्ट के इस फैसले से खुश तो है, लेकिन संतुष्ट नहीं है और उसने दोषी गौरव शुक्ला के लिए और कड़ी सज़ा की मांग की है।

आज से करीब 11 साल पहले यानी 2 मई 2005 को गौरव शुक्ला और उसके 5 साथियों ने आशियाना कालोनी मे जब एक नाबालिग लडकी को अगवा कर उसका चलती कार में बलात्कार किया था तो पूरा शहर हिला गया था। इन रईसजादो ने न सिर्फ उस लड़की का बलात्कार किया बल्कि उसे कई तरह की यातनाएं भी दी थी। लड़की के को सिगरेट से दागा और डॉलीगंज पुल के पास मरता हुआ छोड़ कर भाग गये थे।

इस बालात्कार कांड का मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला यूपी के एक रसूखदार नेता का भतीजा है। बेहद प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखने की वजह से गौरव और उसके परिवार ने मामले को कानूनी पचड़ो में उलझाए रखा लेकिन आज करीब 11 साल उसके भी इंसाफ का वक्त आ गया और हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पिछले हफ्ते ही इस मामले में सत्र न्यायालय को 13 अप्रैल को अपना फैसला सुनाने का आदेश दिया था।

इस मामले में गौरव शुक्ला खुद को जूविनाइल साबित करने में लगा हुआ था। इससे पहले हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गौरव की तरफ से आयु निर्धारण के संबंध में दाखिल पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी और किशोर न्यायालय ने अभियुक्त को बालिग करार देने व सत्र न्यायालय ने अपील में उस फैसले को सही ठहराने की पुष्टि कर दी थी। इसके बाद आरोपी ने एक और दलील दी कि उसने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से भी मुंह की खाने के बाद गौरव के पास कोई रास्ता नही बचा था।

मामले में पीड़ि‍ता के बयान के आधार पर माफिया अरुण शंकर शुक्ला के भतीजे गौरव शुक्ला और उसके दोस्त भारतेंदु शुक्ला, सौरभ जैन, अमन बक्शी, आसिफ सिद्दकी और फैजान के खिलाफ केस दर्ज कर अरेस्ट किया गया। इससे पहले 4 दिसंबर 2005 को गौरव शुक्ला को बेल पर रिहा कर दिया गया। मगर 2007 में भारतेंदु और अमन को दोषी मानते हुए कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई थी। वहीं, ट्रायल के दौरान सौरभ और आसिफ की सड़क हादसे में मौत हो गई। इस मामले के एक और आरोपी फैजान को कोर्ट ने गैंगरेप नहीं, मगर किडनैपिंग के चार्ज में दोषी पाया था।

वीडियो:

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