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एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली पिंकी की कहानी आपके रोंगटे खड़े कर देगी!

एशियन गेम्स में पहली बार खेले गए कुराश में दिल्ली की पिंकी ने सिल्वर मेडल जीता है। लेकिन पिंकी के सिल्वर जीतने तक की कहानी सुनेंगे तो आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे। 18वें एशियम गेम्स में हिंदुस्तान ने नए-नए गेमों में मेडल जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करवाया है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (11 सितंबर): एशियन गेम्स में पहली बार खेले गए कुराश में दिल्ली की पिंकी ने सिल्वर मेडल जीता है। लेकिन पिंकी के सिल्वर जीतने तक की कहानी सुनेंगे तो आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे। 18वें एशियम गेम्स में हिंदुस्तान ने नए-नए गेमों में मेडल जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करवाया है।

 संघर्ष करते हुए भारतीय एथलीट्स और खिलाड़ियों ने मेडल जीतकर देश का नाम रौशन किया है। इनमें से एक नाम पिंकी बलहारा का भी है। पिंकी ने कुराश में सिल्वर मेडल अपने नाम किया है। आपको बता दें कि पिंकी के लिए मेडल जीतने तक का सफर आसान नहीं था। एशियन गेम्स में आने से पहले उन्होंने अपने परिवार के एक नहीं बल्कि 3 सदस्यों की मौत देखी, जिसने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था। लेकिन अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए पिंकी ने खुद को संभाला और देश के लिए मेडल जीता।बता दें कि 19 साल की पिंकी बलहारा दिल्ली के नेब सराय इलाके में रहती हैं। हाल में उनके परिवार में तीन मौत हुई थीं, जिनमें से एक उनके पिता भी थे बावजूद इसके पिंकी ने खुद को लक्ष्य से भटकने नहीं दिया। गौरतब है कि पहली बार कुराश को एशियन गेम्स में शामिल किया गया था। फाइनल मुकाबले में पिंकी को उजबेकिस्तान की गुलनोर ने 10-2 से हराया और 52 किग्रां महिला वर्ग में पिंकी को सिल्वर मडेल से ही संतुष्ट करना पड़ा।पिता की मौत के बाद पिंकी के लिए खुद को संभालना मुश्किल हो गया था। उस वक्त उनके एक चाचा समुंदर टोकस आए और उन्हें सहारा दिया। पिंकी की समस्याएं सिर्फ यहीं खत्म नहीं हुई पिंकी को 20 दिन के प्रैक्टिस सेशन के लिए उज्बेकिस्तान जाना था लेकिन उनके पास वहां जाने के पैसे नहीं थे। ऐसे में उनके गांव वालों ने एक लाख 75 हजार रूपये जुटाए जिनकी मदद से वो ट्रेनिंग ले पाई।


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