51 हजार रुद्राक्ष के गणपति और तांबे के गणपति

दीपक दुबे, मुंबई (7 सितंबर): मुंबई के एक गणेश मंडल ने 51 हजार रुद्राक्ष की गणपति को विराजमान किया है। इसका उद्देश्य है जिस तरह से रुद्राक्ष से शांति समृद्धि और लक्ष्मी का वाश होता है, वैसे ही देश और समाज में इसका फायदा लोगों को हो।

पौराणिक मान्यताएं हैं कि शिव के नेत्रों से रुद्राक्ष का उद्गम हुआ है। यह हर तरह की समस्या को हराने की क्षमता रखता है। कहते हैं रुद्राक्ष सफलता, धन-संपत्ति, मान-सम्मान दिलाने में सहायक होता है। कहा जाता है कि जिन घरों में रुद्राक्ष की पूजा होती है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है। यह भगवान शंकर की प्रिय चीज मानी जाती है और इसी को ध्यान में रखकर मुंबई के विलेपार्ले इलाके में स्थित "विलेपार्ला चा राजा" गणपति पंडाल ने भगवान शंकर के आंखों से निकली रुद्राक्ष को उनके बेटे यानी गणेश जी को रुद्राक्ष में पिरो कर उन्हें बनाया है।

51 हजार रुद्राक्ष के गणपति जी की प्रतिमा को बनाने में दस दिन का समय लगा, जिनकी ऊंचाई 12 फ़ीट है। पुरे शरीर पर रुद्राक्ष ही रुद्राक्ष नजर आएंगे, जो एक मुखी रुद्राक्ष से लेकर 7 मुखी रुद्राक्ष का समावेश इस मूर्ति में किया गया है। इसे देखने के लिए लोग काफी दूर-दूर से आते है। लोगों में रुद्राक्ष से सुसज्जित गणपति बाप्पा को देखेने की काफी उत्सुकता है।

तांबे के गणपति बप्पा... - तांबे की भी अनोखी गणपति प्रतिमा बनाई गई है। - 9 किलो तांबे से मुंबई के विलेपार्ला इलाके के यूथ ग्रुप गणपति मंडल ने यह गणपति बनाया है। - इसे बनाने में 20 दिन का समय लगा। जहां 6 मजदूरों ने मिलकर इसे बनाया।