खुलासा: हिमालय में हुई तबाही, धाराशाही हो गया गंगा का गोमुख

अधीर यादव, नई दिल्ली (27 जुलाई): हिमालय में एक ऐसी तबाही आई है जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। अगर ये सच है तो हिमालय का भविष्य बदल जाएगा। जीवनदायिनी गंगा का उद्गम स्थल गोमुख का ग्लेशियर टूट गया है। वैज्ञानिको ने पाया की कल तक जो विशालकाय गाय के मुख वाला गोमुख गंगा का उद्गम कर रहा था वो ख़त्म हो चूका है। 

इस गोमुख से करोडो लोगो की आस्था जुड़ी है। यहां से जीवन दयानी गंगा अनादी काल से निकलती है। इसके दर्शन करने के लिए देश विदेश से श्रद्धालु हजारो मील पैदल चलकर आते हैं। हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड आते है उस गौमुख को अब शायद ही दुबारा कोई देख सके। बढ़ते ग्लोबल वॉर्मिंग का असर गौमुख पर ऐसा पड़ा की कल तक जो विशालकाय गाय के मुख वाला गौमुख कल कल करती गंगा का उद्गम कर रहा था वो ख़त्म हो चूका है। 

इससे पहले इसी महीने गोमुख गलेशियर का टुकड़ा टूट कर भागीरथ में समा गया था, जिसके बाद से वैज्ञानिकों में हड़कंप मच गया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक हजारों साल से खड़ा गोमुख धाराशाही हो गया है। 12 से 15 फीट गोमुख ग्लेशियर टूट गया और गोमुख गायब हो गया है। इसके टूटने से गोमुख को अब शायद ही कोई देख पाएंगे। उत्तराखंड के वैज्ञानिकों में हड़कंप मच गया है। 

हिमालय में पहले भी इस तरह की उठापटक देखी गयी है कभी तेज़ी से ग्लेशियर पिघलते है तो कभी गंगा अपना रास्ता बदल रही है लेकिन एसा पहली बार हुआ है की गोमुख ही दिखाई देना बंद हो गया हो। अब वैज्ञानिक भी परेशान और हैरान है की आखिरकार ये सब चल क्या रहा है।

अब वैज्ञानिक बारिश बंद होने का इन्तजार कर रहे है। बारिश बंद होने के बाद वाडिया के वैज्ञानिको का एक दल गोमुख जा कर ये पता लगाएगा की आखिरकार ये भू घटना हुई तो हुई कैसे?

गोमुख से ही भगीरथी नदी का उद्गम है  > सर्वप्रथम गंगा का अवतरण होने के कारण यह स्थान गंगोत्री कहलाया। यह स्थान हरिद्वार से 282 कि.मी. की ओर ऋषिकेष से 257 कि.मी. है। > गोमुख से भागीरथी नदी का उद्गम है। हजारों लोग हर वर्ष गंगोत्री आते हैं। गंगोत्री उत्तरकाशी जिले में है यह चार धामों में से एक है। > गोमुख गंगोत्री से 18 किलोमीटर की दूरी पर है। गौमुख हिमनन्द 24 कि.मी. लम्बा और 6 मीट चैड़ा है। > गौमुख, गंगा नदी के निकट तक फैला हुआ है। पूर्व में गंगोत्री से इसकी दूरी 31 किमी. थी परन्तु बर्फ कम होने व वृक्षों के कटान से गौमुख ग्लेशियर पीछे खिसक रहा है > गौमुख नाम के सम्बन्ध में यह मान्यता है कि गंगा को सिर पर धारण करने के लिए शिवजी गोमुख आसन की स्थिति में बैठे थे इसलिए इसका नाम गोमुख है।

गंगोत्री ग्लेशियर पर बढ़ती गर्मी > गंगा के पानी का स्रोत ये ग्लेशियर 30 साल में डेढ़ किलोमीटर तक पिघल चुका है। > हिमाचल सरकार के स्टेट सेंटर फॉर क्लाइमेंमट चेंज के आंकड़े बताते रहे हैं > जानकार बढ़ती गर्मी (ग्लोबल वार्मिंग) को ग्लेशियर पिघलने की वजह बताते हैं।

गंगा नदी का उद्गम > गंगा नदी की प्रधान शाखा भागीरथी है जो उत्तरांचल में कुमायूं में गोमुख से निकलती है। > गंगा के उद्गम स्थल की ऊंचाई 3140mt है, यहां गंगा को समर्पित एक मंदिर भी है 'गंगोत्री तीर्थ'। > गंगोत्री तीर्थ से 9 किमी उत्तर की ओर 3892 मीटर की ऊँचाई पर इस हिमनद का मुख है गोमुख। > गंगोत्री ग्लेशियर 25 किमी लंबा व 4 किमी चौड़ा और लगभग 40 मी ऊंचा है। > माना जाता है कि जल का स्रोत 5000 मी. ऊंचाई पर संतोपंथ की चोटियों में स्थित एक बेसिन है। > इस हिमनद में नंदा देवी, कामत पर्वत एवं त्रिशूल पर्वत का हिम पिघल कर आता है। > भागीरथी (गंगा) के आकार लेने में दो मुख्य नदियों का योगदान है, अलकनंदा और मंदाकिनी। > विष्णु प्रयाग- अलकनंदा की सहायक नदी धौली, विष्णु गंगा है दोनों का विष्णु प्रयाग में संगम होता है। > कर्ण प्रयाग- इसके बाद कर्ण प्रयाग में अलकनन्दा का कर्ण गंगा या पिंडर नदी से संगम होता है। > रुद्र प्रयाग- फिर ऋषिकेश से 139 किमी दूर स्थित रुद्र प्रयाग में अलकनंदा मंदाकिनी से मिलती है। > देव प्रयाग- इसके बाद भागीरथी व अलकनन्दा 1500 फीट पर स्थित देव प्रयाग में मिलती है। > यहाँ से यह सम्मिलित जल-धारा गंगा नदी के नाम से आगे प्रवाहित होती है। > 90 फीसदी गंगा का जल सिंचाई के लिए इस्तेमाल कर लिया जाता है। > 8,61,404 वर्ग किलोमीटर जल ग्रहण क्षेत्र है गंगा का। > 49,34,000 लाख घन मीटर गंदगी हर वर्ष गंगा में डाल दी जाती है। > 40 हजार शवों का प्रत्येक वर्ष गंगा के किनारे अंतिम संस्कार किया जाता है। > 15 हजार टन राख हर साल इस नदी में बहा दी जाती है। > 1,800 गंगा की डॉल्फिन वर्तमान में बची हैं।