फर्जी डिग्री बांटने वाले गिरोह का पर्दाफाश, बांट रहा था MBBS, MBA की डिग्रियां

नई दिल्ली(30 जनवरी): पुलिस ने फर्जी डिग्री बांटने वाले एक गिराह का पर्दाफाश किया है। गिरोह देश के तमाम नामी शिक्षण संस्थानों की फर्जी वेबसाइट्स बनाकर उनके जरिए लोगों से पैसे ऐंठकर उन्हें फर्जी डिग्रियां और सर्टिफिकेट देता था।

- ये लोग 10वीं और 12वीं के साथ-साथ बीएड, बीटेक, जेबीटी, एलएलबी, एमबीबीएस, आईटीआई, एमबीए जैसे तमाम र्कोसेज की फर्जी डिग्रियां और मार्क शीट बनाते थे। 

- खास बात यह है कि इस गिरोह के तीन सदस्यों में से एक 12वीं पास और दूसरा 8वीं फेल है। इनके पास से पुलिस ने भारी मात्रा में फर्जी मार्क शीट्स, सर्टिफिकेट, ब्लैंक मार्क शीट्स, 20 लाख रुपये, 2 फोन, एक कंप्यूटर और एक प्रिंटर भी बरामद किया है। 

- डीसीपी (वेस्ट डिस्ट्रिक्ट) विजय कुमार के मुताबिक, आरोपियों की पहचान हरि नगर निवासी पंकज अरोड़ा (35), जालंधर के रहने वाले पविंदर सिंह उर्फ सोनू (40) और लुधियाना के रहने वाले गोपाल कृष्ण उर्फ पाली (40) के रूप में हुई है।

-  ग्रैजुएशन कर चुके पंकज ने हरि नगर में एसआरकेएम एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी के नाम पर एक संस्थान खोल रखा था और उसी के जरिए ये लोग फर्जी डिग्रियां देते थे। 8वीं फेल गोपाल फर्जी मार्क शीट्स और डिग्रियां प्रिंट करके इन लोगों को मुहैया कराता था। सोनू को दिल्ली पुलिस पहले भी चीटिंग के एक केस में अरेस्ट कर चुकी थी। 

- पुलिस के मुताबिक, राजस्थान के सीकर के रहने वाले विजय कुमार नाम के एक शख्स ने हरि नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि राजस्थान के एक लोकल न्यूजपेपर में उन्होंने एसआरकेएम एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी का विज्ञापन देखकर 10वीं पास करने के लिए इस संस्थान के संचालक पंकज से संपर्क किया था। इन लोगों ने विजय कुमार और उनके 7 दोस्तों को किसी अच्छे संस्थान में एडमिशन दिलाने के बदले में उनसे 1,31,000 रुपये का पेमेंट भी ले लिया था। कुछ दिन बाद विजय को आंध्रप्रदेश के सेकंडरी एजुकेशन बोर्ड की 10वीं की मार्कशीट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट डाक के जरिए मिले। जब उस मार्कशीट के जरिए शिकायकर्ता ने सीकर में पासपोर्ट के लिए एप्लाई किया, तो उन्हें पता चला कि उनकी 10वीं की मार्कशीट फर्जी है। 

- विजय की शिकायत के आधार पर हरि नगर थाने में चीटिंग, फर्जीवाड़े व अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस के जरिए उसे अरेस्ट कर लिया। पूछताछ के बाद उसके दो अन्य साथी भी पकड़े गए। छानबीन में पता चला है कि ये लोग अब तक कई लोगों को ऐसे ही फर्जी मार्क शीट्स और सर्टिफिकेट्स दे चुके हैं। इन्होंने कई शिक्षण संस्थानों की फर्जी वेबसाइट्स भी बना रखी थी।