इशरत जहां एनकाउंटर केस में होल्ड फोन से हुए खुलासे से मचा हड़कंप

अमित कुमार, नई दिल्ली (16 जून): इशरत जहां एनकाउंटर केस में एक होल्ड फोन से हुए खुलासे से हड़कंप मच गया। इशरत केस की गुम फाइलों की जांच के तरीके पर इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया कि जांच करने वाले अफसर बीके प्रसाद ने बयान दर्ज कराने वाले अफसरों को खुद ही सारे जवाब रटा दिये थे। वहीं, तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम सरकार पर फर्जी विवाद पैदा करने का आरोप जड़ दिया है। 

इशरत जहां एनकाउंटर मामले में सरकारी फाइल के गुम होने को लेकर भले ही जांच रिपोर्ट सौंप दी गई हो। लेकिन इस जांच के तरीके को लेकर बड़े सवाल खड़े हुए हैं। अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया है इशरत केस के गुम फाइलों की जांच के मामले में अधिकारियों ने सोचे समझे प्लान के तहत रिपोर्ट तैयार की है। इसके सबूत के तौर पर अखबार ने एक ऑडियो क्लिप जारी की है।

अखबार का दावा है कि इसी साल 25 अप्रैल को करीब शाम पौने चार बजे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अफसर बीके प्रसाद और संसद के हिंदी विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी अशोक कुमार के बीच बातचीत के कुछ हिस्से इत्तेफाकन रिकॉर्ड हो गए। जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि जांच करने वाले अफसर ने बयान दर्ज कराने वाले अफसरों को पहले से सवाल और जवाब भी बताए।

खबर सामने आते ही केंद्रीय गृह मंत्रालय में तैनात एडिश्नल सेक्रेटरी बीके प्रसाद की ओर से भी सफाई दी गई। अशोक कुमार को रटा कर बयान दर्ज किया गया इसके बारे में हमारी बातचीत से कोई स्थापित सबूत नहीं पेश किया गया है। बीके प्रसाद ने सफाई दी कि अखबार के दावे के मुताबिक उन्होंने अशोक कुमार से वैसी कोई पूछताछ नहीं की जिसका हवाला दिया जा रहा है। इस बीच तत्कालीन गृह मंत्री पी चिंदबरम ने भी एक बयान जारी कर कहा। अखबार में छपी खबर में भंडाफोड़ किया है कि इशरत जहां मामले में केंद्र सरकार द्वारा दायर किए गए दो हलफनामों पर NDA सरकार ने फर्जी विवाद पैदा किया।                                                             वैसे सफाई चाहे जो हो लेकिन सरकार के पास वो रिपोर्ट पहुंच चुकी है जिसकी उसे तलाश थी। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि इशरत केस में तरह तरह की जांच करके मोदी सरकार सिर्फ सियासत करने की कोशिश कर रही है।

आपको बता दें कि मोदी सरकार आरोप लगाती रही है कि यूपीए के जमाने में इशरत जहां से जुड़ी फाइल गायब की गई थी. जांच रिपोर्ट में भी जिक्र है कि 18 सितंबर से 24 सितंबर 2009 के बीच एक फाइल गायब हुई जिसमें अहम हलफनामा था। इस हलफनामे में तब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने खुफिया विभाग की रिपोर्ट के हवाले से इशरत और उसके साथियों को लश्कर का आतंकी बताया था। मोदी सरकार ने इसी फाइल की तलाश के लिए जांच करवाई है जो अभी तक नहीं मिली है।