समाजवादी पार्टी में 'दंगल', वायरल हुआ ये चलीसा...

नई दिल्ली (10 नवंबर): पिता मुलायम और पुत्र अखिलेश में पार्टी में बर्चस्व को लेकर सियासी संग्राम जोरों पर है। आलम ये है पार्टी तकरीबन टूट चुका है। हालांकि शुभचिंतक समाजवादी पिता-पुत्र में समझौते की हर मुमकिन कोशिश में जुटे हैं। फिर भी दोनों में फिलहाल सुलह होता नहीं दिख रहा है।

समाजवादी पार्टी में जारी इस पारिवारिक घमासान पर इन दिनों एक एक चालीसा वायरल हो रही है। चालीसा के ज़रिए समाजवादी पार्टी के पूरे विवाद को नाटक बताते हुए उसे बेहद रोचक तरीके से पेश किया गया है।

समाजवादी पार्टी के 'दंगल' पर चालीसा...

राजनीति में बढ़ गया, चाचा का उत्पात ।

कहा भतीजा परख लो, खुद अपनी औकात ।।

तब अखिलेश पिता पहिं आवा।

उथल-पुथल की बात बतावा ।।

कहे मुलायम कोमली बानी।

देखहु सुत अब दांव पुरानी।।

कुछ दिन अवधि दूर रह थोरी।

जबतक करूं व्यवस्था तोरी।।

अलग-विलग कर नाटक कीन्हां।

शक्ति-परीक्षण अवसर दीन्हां।।

अधिक विधायक साथ तिहारे।

बिना युद्ध ही चाचा हारे।।

तब बोले शिवपाल से, खड़ी हो गई खाट।

यही मुलायम-दांव है, प्रबल धोबियापाट।।

बंदउं मैं शुभ चरित मुलायम।

गुंडा-राज जहां पर कायम।।

बाहुबली जिनकर रखवाले।

जिनके प्रिय शिवपाल दुलारे।।

अपदस्थ निज पूतहिं कीन्हां।

अंत समय दारुन दुख दीन्हां।।

सब प्रतिपक्ष उड़ावत खिल्ली।

अनुज समेत गए तब दिल्ली।।

अमर सिंह लंदन से आया।

जयाप्रदा को भी बुलवाया।।

मिलकर के विह्वल भए, अंतरंग सब लोग।

व्यथित भाव में चल पड़े, निर्वाचन-आयोग।।

उधर रामगोपाल सयाना।

कहा तात अब साध निशाना।।

सीएम को बहुविधि समझावा।

पार्टी-दफ्तर बोलहु धावा।।

पुत्र-धर्म का मर्म बताया।

संरक्षक पितु को बनवाया।।

अधिवेशन अब लेहु बुलाई।

तुम्हरे बहुमत पड़े दिखाई।।

अखिलेश की सूची जारी।

चाचा दबे भतीजा भारी।।

शिवपाल सेंटर में जाएं।

यूपी में ना टांग अड़ाएं।।

बाहुबली सब टिकट न पइहें।

मुख्तार भी बाहर जइहें।।

अब अतीक पड़ी जइहें फीका।

ई होई अखिलेश तरीका।।

यही पिता की नीति है, अवरोध हों ध्वस्त।

बेटे को मजबूत कर, करदें मार्ग प्रशस्त।।