जानिए, ओलंपिक पदक विजेता साक्ष‍ी मलिक की अनसुनी कहानी...

नई दिल्ली (18 अगस्त) : रियो ओलंपिक में फ्रीस्टाइल कुश्ती के 58kg वर्ग में भारत को कांस्य पदक दिलाकर भारतीय महिला पहलवान साक्षी मलिक ने इतिहास रच दिया है। ओलिंपिक खेलों में भारत का महिला कुश्ती में पहला तथा महिलाओं को चौथा मेडल है। साक्ष‍ी की इस उपलब्धि पर पूरे देश को गर्व है। जानिए कौन हैं साक्षी मलिक और उनसे जुड़ी कुछ अनसुनी बातें...

- साक्षी मलिक हरियाणा के रोहतक जिले के मोखरा गांव की रहने वाली हैं।  - उनका जन्म 3 सितम्बर 1992 को हुआ था।  - साक्षी के पिता सुखबीर मलिक दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन में काम करते हैं।  - जबकि उनकी मां सुदेश मलिक रोहतक में आंगनबाड़ी सुपरवाइजर है। - कुश्ती को लेकर साक्षी में बचपन से ही जुनून था।  - साक्षी ने 12 साल की उम्र में कुश्ती के दांव आजमाने शुरू कर दिए थे। - वे 58 किलोग्राम कैटेगरी में फ्रीस्टाइल कुश्ती खेलती हैं।  - साल 2004 में साक्षी  ईश्वर दहिया के अखाड़े से जुड़ गई थीं।  - उन्होंने 2010 में जूनियर वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीती में ब्रॉन्ज जीता था।  - बाद में 2014 में सीनियल लेवल पर डेव शुल्ज इंटरनेशनल रेसलिंग टूर्नामेंट में गोल्ड जीता था। - इस प्रतियोगिता में उन्होंने अमरीकी खिलाड़ी को मात दी थी।  - 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ में साक्षी ने रजत पदक जीता था।  - 2015 में दोहा में सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। 

ड्रेस इतनी पसंद आई की खेलनी शुरू कर दी कुश्ती - साक्षी की मां कहती हैं कि मैं कभी नहीं चाहती थी कि बेटी पहलवान बने।  - समाज में अक्सर यही कहा जाता रहा कि पहलवानों में बुद्धि कम होती है,  - साक्षी पढ़ाई में पिछड़ गई तो कॅरिअर कहां जाएगा। - यह बात हरदम चुभती रहती थी - लेकिन खेल में 6 से 7 घंटे प्रैक्टिस करने के बाद भी साक्षी ने पढ़ाई में 70 फीसदी मार्क्स लेकर इस मिथक को तोड़ दिया। - उसके कमरे में आज गोल्ड, सिल्वर व ब्रांज मेडल का ढेर लगा है।  - पहली दफा 15 साल पहले साक्षी को उनकी मां खिलाड़ी बनाने के लिए छोटूराम स्टेडियम लेकर गई थी। - यहां कोच ने लड़की होने के नाते उसे जिम्नास्टिक खेलने के लिए कहा, मगर साक्षी ने साफ इंकार कर दिया।  - उसने एथलीट अदर स्पोर्ट्स भी देखे, लेकिन कोई पसंद नहीं आया। - कुश्ती हॉल में पहुंची तो यहां पहलवानों को कुश्ती ड्रेस में देखा।  - ड्रेस इतनी पसंद आई कि कुश्ती पर ही हामी भरी। - इसके बाद साक्षी ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और लगातार प्रैक्टिस से यह मुकाम हासिल किया है।  - साक्षी के पिता सुखवीर मलिक कहते हैं कि जब साक्षी सात साल की होने तक अपने दादा दादी के पास रही। - जब गांव के लोग मेरे पिता जी से मिलने आते थे तो पहलवान जी राम-राम कहते थे - तभी से उसने ठान लिया कि वो दादा की तरह पहलवान बनेगी. 

कैसे करती हैं प्रैक्टिस - साक्षी मलिक रोजाना 6 से 7 घंटे प्रैक्टिस करती हैं। - ओलिंपिक की तैयारी के लिए वे पिछले एक साल से रोहतक के साई(स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) होस्टल में रह रही थीं। - उन्हें वेट मेनटेन करने के लिए बेहद कड़ा डाइट चार्ट फॉलो करना पड़ता था। - कड़ी प्रैक्टिस के बावजूद वे पढ़ाई में अच्छे मार्क्स ला चुकी हैं। - रेसलिंग की वजह से उनके कमरे में गोल्ड, सिल्वर व ब्रांज मेडल का ढेर लगा है।

कौन-कौन से मेडल जीते गोल्ड- 2011, जूनियर नेशनल, जम्मू ब्रॉन्ज- 2011, जूनियर एशियन, जकार्ता सिल्वर-2011, सीनियर नेशनल, गोंडा गोल्ड- 2011, ऑल इंडिया विवि, सिरसा गोल्ड- 2012, जूनियर नेशनल, देवघर गोल्ड-2012, जूनियर एशियन, कजाकिस्तान ब्रॉन्ज- 2012, सीनियर नेशनल, गोंडा गोल्ड- 2012, ऑल इंडिया विवि अमरावती गोल्ड- 2013, सीनियर नेशनल, कोलकाता गोल्ड- 2014, देन सतलज मेमोरियल, यूएसए गोल्ड- 2014, ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी, मेरठ

रेसलिंग में पहला, महिलाओं को चौथा ओलिंपिक मेडल - साक्षी ओलिंपिक में मेडल जीतने वाली भारत की चौथी एथलीट बन गई हैं। - 2000 में कर्णम मल्लेश्वरी ने वेटलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज जीता था। - 2012 में मैरी कॉम ने बॉक्सिंग में ब्रॉन्ज जीता। - 2012 में साइना नेहवाल ने बैडमिंटन में ब्रॉन्ज जीता।