'फ्रीडम 251' की मुश्किलें बढ़ी, ये कंपनी करेगी मुकदमा

नई दिल्ली(5 मार्च): दुनिया का सबसे सस्ता फोन 'फ्रीडम 251' बनाने का दावा करने वाली नोएडा की स्टार्ट अप कंपनी रिंगिग बेल्स प्रा. लि. पर चीनी कंपनी एडवांटेड कंप्यूटर्स (एडकॉम) मुकदमा करने जा रही है। रिगिंग बेल्स ने पिछले महीने महज 251 रुपये में दुनिया के सबसे सस्ते स्मार्ट फोन की घोषणा की थी। लेकिन फोन की लांचिंग के अवसर पर इस कंपनी ने मीडियाकर्मियों को प्रोटोटाइप मॉडल के तौर पर एडकॉम कंपनी के फोन दिए थे।

इस फोन के लांचिंग कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी भी उपस्थित थे। रिंगिग बेल्स के अध्यक्ष अशोक चड्ढा ने बताया कि उस कार्यक्रम में जो फोन बांटे गए थे, वो सैंपल के तौर पर दिए गए थे। जबकि 'फ्रीडम 251' बिल्कुल नया उत्पाद होगा। वहीं, एडकॉम के संस्थापक और चेयरमैन संजीव भाटिया ने बताया कि हम इस घटना से काफी दुखी हैं कि हमारे फोन को 251 रुपये का फोन बताते हुए बांटा गया। इसलिए हम इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। क्योंकि इससे एडकॉम की छवि और ब्रांड नाम पर असर पड़ा है और हम नहीं चाहते कि हमें आगे भी कोई हानि होउन्होंने कहा कि उनकी कंपनी ने रिंगिंग बेल्स कंपनी को कुछ फोन बेचे थे, जैसा कि एडकॉम अन्य लाखों उपभोक्ताओं को फोन बेचती है। लेकिन हमें कंपनी के इसे दुबारा से बेचने की योजना की जानकारी नहीं थी। भाटिया बताते हैं कि उन्हें रिंगिंग बेल्स की कीमत नीति अभी तक समझ में नहीं आई, क्योंकि जिस फोन को वे 3,600 रुपये में बेचते हैं, उसे वो 251 रुपये में कैसे बेचेंगे।

इससे पहले गुरुवार को रिंगिंग बेल्स के नोएडा कार्यालय पर भी ताला लगा देखा गया, क्योंकि नोएडा प्राधिकरण के साथ जमीन के मालिकाना हक को लेकर कोई मुद्दा है। रिंगिग बेल्स ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि उसे किसी विवाद में शामिल नहीं किया जाए। उनका ऑफिस किराए पर है और उनके मकान मालिक का प्राधिकरण के साथ कोई मुद्दा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी रिगिग बेल्स के सीईओ मोहित गोयल से इस स्मार्टफोन के बारे में पूछताछ की थी।

रिंगिंग बेल्स ने दावा किया है कि जिन लोगों ने 251 रुपये अदा करके उनके फोन की बुकिंग कराई थी,उनके पैसे वापस कर दिए गए हैं। जब यह फोन लांच होगा तभी डिलीवरी के वक्त नगद राशि ली जाएगी। कंपनी का कहना है कि वो 30,000 फोन महज 251 रुपये के कीमत पर बेचेगी और यह उन्हीं को दिया जाएगा जिन्होंने पंजीकरण कराया है।

वहीं, भारत सरकार ने कहा है कि यह कोई सरकारी परियोजना नहीं है जैसा कि कंपनी दावा कर रही है। औद्योगिक नीति व संवर्धन विभाग के सचिव अमिताभ कांत ने एक ट्वीट कर बताया कि यह कोई सरकार की परियोजना नहीं है। मेक इन इंडिया की टीम का इसके साथ कोई लेना-देना नहीं है।