आतंकी मसूद पर साथ देने के बाद फिर यूएन में भारत के लिए खड़ा हुआ फ्रांस

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (9 मई): संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने कराने में भरपूर मदद करने के बाद एकबार फ्रांस ने भारत के साथ अपनी दोस्ती की मिसाल कायम की है। फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र के सिक्योरिटी काउंसिल में भारत की स्थायी सदस्यता की पूरजोर वकालत की है। भारत के साथ जर्मनी, ब्राजील औऱ जापान का नाम लेते हुए फ्रांस ने कहा कि- इंडिया और जर्मनी, ब्राजील और जापान जैसे देशों को स्थायी सदस्यता एकदम जरूरी है, ताकि एक बड़ी और परिष्कृत यूएन सिक्योरिटी काउंसिल मौजूदा परिस्थितियों को ठीक से पहचान कर आगे बढ़ सके। यहीं फ्रांस की कूटनीतिक प्राथमिकता है। 

फ्रांस के राजदूत फ्रांसुआ डेलातर ने यूएन में कहा कि इन सभी देशों को स्थायी सदस्यता दिए जाने की सख्त जरूरत है, जिससे ये देश अपनी स्थिति को रणनीतिक रूप से सुधार सकें। संयुक्त राष्ट्र में इन देशों को सदस्यता दिलाना फ्रांस की प्राथमिकताओं में से एक है। राजदूत ने कहा कि भारत इस पद के लिए मजबूत दावेदार है। उसने कई चुनौतियों का सामने रहकर और डटकर सामना किया है। साथ ही डेलातरे ने कहा, 'फ्रांस एवं जर्मनी ने मजबूत नीति बनाई है जो सुरक्षा परिषद को विस्तार देने के लिए साथ काम करने और बातचीत को सफल बनाने से जुड़ी है. हम वास्तविक दुनिया का प्रतिनिधित्व करने के लिए सुरक्षा परिषद के विस्तार को निहायत ही जरूरी मानते हैं। इसमें कोई सवाल ही नहीं उठता है।' इससे पहले पिछले सप्ताह डेलातर ने मीडिया से कहा था, 'फ्रांस और जर्मनी के पास मजबूत नीति है। यह दोनों देश मिलकर यूएन के विकास के लिए काम करते हैं। यूएन के विकास के लिए जर्मनी को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए, ताकि हम दुनिया को बेहतर ढंग से दर्शाने का काम कर सकें। हम इसे बेहद जरूरी समझते हैं।' उन्होंने कहा कि भारत भी यूएन के सिक्युरिटी काउंसिल में लंबे समय से स्थायी सदस्यता हासिल करने की कोशिश कर रहा है। सही मायने में वह इसका हकदार भी है।

आपको बता दें भारत लंबे समय से यूएन में सिक्योरिटी काउंसिल में सदस्यों की संख्या बढ़ाये जाने की मांग करता रहा है। जिसमें भारत की दावेदारी सबसे मजबूत है। भारत की लगातार कोशिशों के बाद यूएन में केटैगरिज़ ऑफ मेंबरशिप के इश्यू को लेकर 122 में से 113 देशों ने सिक्योरिटी काउंसिल में सदस्यों की संख्या बढाने के पक्ष में डॉक्यूमेंट फ्रेमवर्क जमा करा दिया है। यानि यूएन के 90 फीसदी से ज्यादा सदस्य देश संख्या बढाने के पक्ष में हैं। अब देखना ये है कि ये कब संभव हो पाता है।