130 साल पहले इस 'हिंदू' मूर्ति के सिर को ले जाया गया था फ्रांस, अब लौटाया

नई दिल्ली (21 जनवरी): फ्रांस ने हिंदू देवता की सातवीं सदी की मूर्ति के सिर को कम्बोडिया को लौटा दिया है। मूर्ति के इस हिस्से को बाकी शरीर के साथ जोड़कर एक म्यूजियम की प्रदर्शिनी में गुरुवार को लगाया गया। मूर्ति के इस हिस्से को 130 साल पहले कम्बोडिया से ले जाया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, पत्थर की यह मूर्ति 'हरिहर' की है। जिसे विष्णु और शिव का सम्मिलित रूप माना जाता है। जो हिंदू परंपरा के दो महत्वपूर्ण भगवान माने जाते हैं। जो ब्रह्मांड के निर्माण और संहार के प्रतीक माने जाते हैं। इस हिस्से को दक्षिणी टैकियो प्रांत के फनोम डा मंदिर से 1882-83 में फ्रांसीसी रीसर्चर्स ले गए थे। इसे फ्रांस के गिमेट म्यूजियम में प्रदर्शित किया गया था। 

नेशनल म्यूजियम में मूर्ति के सिर को फिर से जोड़े जाने के आयोजन के मौके पर करीब 200 सरकारी अधिकारी, विदेशी सरकारों के प्रतिनिधि, राजदूत और गिमेट म्यूजियम के अधिकारी मौजूद रहे। उपप्रधानमंत्री सोक एन ने आयोजन में कहा, ''130 साल पहले इसे अलग किए जाने के बाद, हम हरिहर के सिर और धड़ के फिर से मिलन का स्वागत करते हैं।'' उन्होंने कहा, ''खमेर संस्कृति के मुताबिक, फिर से संयोजन होना समृद्धि का प्रतीक है।'' उन्होंने दूसरे देशों से भी कम्बोडिया की कलाकृतियों को लौटाने की अपील की। 

1993 का कम्बोडियाई कानून सरकारी मंजूरी के बिना सांस्कृतिक कलाकृतियों को हटाए जाने पर मनाही है। इस तारीख के बाद जिन हिस्सों को ले जाया गया, उनको कानूनी आधार पर उनके मालिकों को वापस करने के लिए मजबूर किया जा सकता है। कला के क्षेत्र में एक आम सहमति है, कि अगर 1970 के बाद बिना किसी वैध दस्तावेजों के इन्हें एक्सपोर्ट किया जाता है, तो इसे अवैध माना जाएगा। इसी संयुक्त राष्ट्र सांस्कृतिक सहमति में प्राचीन वस्तुओं की तस्करी को निशाना बनाया गया था। 

बता दें, अक्टूबर में कम्बोडिया ने आंगकोर काल की पत्थर की दो मूर्तियों को वापस किए जाने का स्वागत किया था। इन्हें देश में हुए सिविल वॉर में लूटकर यूरोप ले जाया गया था। जहां वे पिछले तीन दशकों तक रहीं थीं।