बास्तील-डे मनाने जुटी थी भीड़, जानिए क्या है अहमियत इस दिन की

नई दिल्ली(15 जुलाई): फ्रांस के नीस शहर में बास्तील डे का जश्न मना रहे लोगों पर ट्यूनीशिया ओरिजिन के एक शख्स ने हमला कर दिया। भारी ट्रक में सवार हमलावर 60 से 70 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से लोगों को कुचलता चला गया। इसमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इनमें कई महिलाएं और बच्चे हैं। 

एक मोटरसाइकल सवार ने कूदकर ट्रक पर चढ़ने की कोशिश की ताकि वह हमलावर को रोक सके, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली। हमले के वक्त भारतीय मूल की ब्रिटिश सरोगेसी लॉयर हरजीत सारंग भी वहां मौजूद थीं। लेकिन वे सेफ हैं। फ्रांस आठ महीने बाद इतने बड़े हमले का शिकार हुआ है। इससे पहले नवंबर 2015 में आतंकी हमले में 130 लोगों की मौत हो गई थी। 

किस लिए जुटे थे लोग?

- नीस शहर में लोग बास्तील-डे मनाने के लिए इतनी बड़ी तादाद में सड़कों पर मौजूद थे।

- बता दें कि बास्तील के किले में क्रान्तिकारियों और खूंखार कैदियों को रखा जाता था। 14 जुलाई 1789 को भीड़ ने किले को तोड़ डाला।

- यह घटना फ्रांस के इतिहास में बहुत अहमियत रखती है, क्योंकि इसी से महान फ्रांसीसी क्रान्ति की शुरुआत मानी जाती है।

- इसी याद में 14 जुलाई को बास्तील डे मनाया जाता है।