पूर्व चीफ जस्टिस लोढ़ा बोले- न्यायपालिका में मौजूदा स्थिति ठीक नहीं

नई दिल्ली (02 मई): सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जस्टिस लोढ़ा ने मंगलवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय में आज जो दौर हम देख रहे हैं वह दुखद है। जरूरी है कि सभी जजों के बीच सहयोगपूर्ण संवाद बहाल हो। न्यायाधीशों का अलग-अलग नजरिया होते हुए भी उन्हें ऐसा करना चाहिए कि उच्चतम न्यायालय को आगे ले जाए। जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता और सीजेआई को उसे आगे बढ़ाना है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी की किताब ‘अनीता गेट्स बेल’ के विमोचन के अवसर पर बोलते हुए जस्टिस लोढ़ा ने कहा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट में जो दौर देख रहे हैं, कम के कम इसे विनाशकारी कहा जा सकता है। यह सहशासन (कालीजिएलिटी) बहाल करने के लिए उपयुक्त समय है। जजों का दृष्टिकोण और नजरिया अलग हो सकता है, लेकिन उन्हें सुप्रीम कोर्ट को आगे ले जाने के लिए एक साझा जमीन तलाशनी होगी। इसी से न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बहाल रखा जा सकेगा।जस्टिस लोढ़ा को अपने कार्यकाल के दौरान उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ के मामले में ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था। तब एनडीए सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिश से जुदा राय व्यक्त की थी। यही नहीं वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम को शीर्ष अदालत के जज बनाने की सिफारिश पर फिर से विचार करने को कहा था। हालांकि बाद में सुब्रह्मण्यम खुद ही रेस से हट गए थे।