लाहौर की सड़कों पर ऑटो रिक्शा चला रहा है पाकिस्तानी ओलंपियन

नई दिल्ली (4 अगस्त): ओलंपिक खेलों में दो बार पाकिस्तानी परचम उठाने वाला शख्स आज लहौर की सड़कों पर ऑटो रिक्शॉ चला कर अपनी गुज़र-बशर कर रहा है। अपनी जिंदगी के 81 साल पूरे कर चुके इस शख्स का नाम मुहम्मद आशिक है।

- आशिक ने मुक्केबाजी के खेल को अपना पेशा बनाया लेकिन परिवार के दबाव की वजह साइकिलिंग की तरफ मुड़ गये।

- साइकिलिंग में आशिक ने ढेर सारे मेडल और ट्रॉफियां जीतीं।

- एक वक्त था कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री जैसे लोग उसे मिलने के लिए बुलाते थे।

- वो उस दौर के पाकिस्तान के हीरो थे।

- आशिक ने 1960 के रोम और 1964 के टोक्यो ओलंपिक में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया था।

- आशिक को मलाल है कि दोनों ही बार वो पाकिस्तान के लिए मैडल नहीं जीत पाये। 

- लेकिन सबसे बड़ा मलाल यह कि जिस देश की सेवा लिए उन्होंने अपने जीवन के सबसे अच्छे दिन निकाले वो देश ही उन्हें भूल चुका है।

- आशिक ने अपने ऑटो रिक्शा में अपने मैडल टांग रखे हैं। जब भी कोई क्लाइंट इन मैडल्स के बारे में पूछता है तो वो रूंधे गले से अपनी कहानी सुना देते हैं। -   उन्होंने अपने आटो पर अमेरिकन राष्ट्रपति कैलविन कूलिज की यह कहावत भी लिख रही है-'जो देश अपने हीरोज़ को भूल जाता है वो कभी तरक्की नहीं कर      सकता।'

- आशिक लोगों से यह भी कहते हैं कि अपने बच्चों को खेलों में हिस्सा मत दिलवाना वरना उन्हें और तुम्हें भी ऐसा ही दुख सहन करना पड़ सकता है।