INSIDE STORY: #SAARC में PAK का #Boycott, #Pakistan ने ऐसे किया सार्क को फेल...

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (28 सितंबर) : उरी हमले के बाद दुनियाभर में पाकिस्तान को अलग-थलग करने की मुहिम के तहत भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 19वें SAARC शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पाकिस्तान नहीं जाएंगे। भारत ने इस साल 8-9 नवंबर को इस्लामाबाद में होने वाले सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया है। भारत के ऐलान के बाद बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी सम्मेलन में भाग नहीं लेने का फैसला किया है। बांग्‍लादेश और भूटान ने वर्तमान में SAARC की अध्यक्षता कर रहे नेपाल को पत्र भेजकर भाग लेने की असमर्थता जाहिर की। वहीं अफगानिस्तान पहले भी आतंकवाद का हवाला देते हुए पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए SAARC का बहिष्कार करने का आहवान कर चुका था। 

उरी हमले के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में पीएम मोदी ने साफ ऐलान किया था कि भारत पाक को दुनिया में अलग-थलग कर देगा। उसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दुनिया के सभी देशों से पाकिस्तान को अलग-थलग करने की अपील की थी। जिसका असर भी दुनियाभर में दिखने लगा है। गौरतलब है कि इसी साल अगस्त की शुरुआत में SAARC कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने गए गृहमंत्री राजनाथ सिंह का पाकिस्तान दौरा काफी विवा‍दों में रहा था। दौरे पर दोनों देशो के बीच कड़वाहट देखने को मिली थी। राजनाथ सिंह बिना लंच किए वहां से लौट आए थे। इसके बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने SAARC  कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया था। 

पाकिस्तान की नकारात्मक मानसिकता और अडि़यल रवैए के कारण SAARC के खाते में सफलता से ज्यादा विफलताएं रही हैं। यही कारण है कि 1.5 अरब लोगों की आबादी को जोडने वाला SAARC संगठन 1985 से अब तक दो दर्जन से अधिक शिखर बैठकों के बावजूद बड़ी संधियां तो दूर, संवाद का एक गतिमान ढांचा तक नहीं बना पाया है। पाकिस्तान हकीकत में SAARC की सबसे कमजोर कड़ी बन गया है और अगर SAARC कहीं फेल हो रहा है तो उसका सिर्फ और सिर्फ जिम्मेदार पाकिस्तान है।

SAARC समिट को लेकर किस देश ने क्या कहा... - पाकिस्तान में होने वाली SAARC समिट में हिस्सा नहीं लेगा बांग्‍लादेश, भूटान और अफगानिस्तान कहा, माहौल सही नहीं है। - बांग्‍लादेश और भूटान ने वर्तमान में दक्षेस की अध्यक्षता कर रहे नेपाल को पत्र भेजकर भाग लेने की असमर्थता जाहिर की।  - अफगानिस्तान पहले भी आतंकवाद का हवाला देते हुए पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए SAARC का बहिष्कार करने का आहवान कर चुका है।  - बंगलादेश सरकार ने भी कहा एक देश द्वारा आंतरिक मामलों में बढ़ती दखलअंदाजी से ऐसा माहौल बन गया है।  - बंगलादेश सरकार आधिकारिक तौर पर कहा है कि बंगलादेश क्षेत्रीय सहयोग और संबंध की अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है  - लेकिन साथ ही उसका मानना है कि सौहार्दपूर्ण माहौल में ही ये चीजें आगे बढ़ सकती हैं लेकिन मौजूदा प्रस्थितियां इसके अनुकूल है। - ऐसे में बंगलादेश इस्लामाबाद में प्रस्तावित 19वें SAARC शिखर सम्मेलन में भाग नहीं ले सकता। - भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त सैयद मुअज्जिम ने कहा, पाकिस्तान सार्क देशों का हिस्सा है और इसे शांति बनाए रखने में सहयोग देना होगा। - SAARC शिखर सम्मेलन को लेकर श्रीलंका और नेपाल का रुख अभी साफ नहीं है, लेकिन माना जा रहा है दोनों देश भी भाग लेने से मना कर सकते हैं।

क्या है SAARC

- SAARC (साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल को-ऑपरेशन) साउथ एशिया के 8 देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है। - इसकी शुरुआत 8 दिसंबर, 1985 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुई थी। - इसके सदस्य राष्ट्र हैं भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान।

पाकिस्तान सार्क की सबसे कमजोर कड़ी... - पाकिस्तान की नकारात्मक मानसिकता और अडि़यल रवैए के कारण सार्क के खाते में सफलता से ज्यादा विफलताएं रही हैं। - भारत जहां EU की तरह सार्क देशों में संबंध स्थापित करना चाहता है, तो वहीं पाकिस्तान हमेशा ना नुकर की स्थिती में रहता है। - भारत ने 18वें शिखर सम्मेलन में जहां सार्क देशों के बीच मोटर वाहनों, ट्रेन सेवाओं और बिजली उपलब्ध कराने की पहल की। - वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने तुरंत उसे खारिज करते हुए तर्क दिया अभी उनके देश में इस मुद्दे पर चर्चा होनी बाकी है।  - यही नहीं उन्होंने सार्क में पर्यवेक्षक देशों की भूमिका बढ़ाने की आड़ में चीन को सार्क का स्थायी सदस्य बनाने की चाल चल दी।

SAARC के खाते में सफलता से ज्यादा विफलताएं रहीं... - सार्क की स्थापना के 30 साल बाद इसे प्रतीकों से आगे बढ़ कर देखने की ज़रुरत है। - सार्क विश्वविद्यालय हो या सार्क सैटेलाइट, इसे इसकी वास्तविक उपलब्धि नहीं कह सकते। - दक्षिण एशिया में तरक्की की संभावनाएं अनेक हैं, चाहे कच्चा माल हो या कार्यकुशल श्रम, यहां सब कुछ मौजूद है। - सार्क की स्थापना के उद्देश्यों में एक था इस क्षेत्र को ग़ुरबत से उठा कर विकास के रास्ते पर लाना। - सार्क का मक़सद था क्षेत्र में एकीकरण, बेहतर कनेक्टिविटी और आपसी व्यापार बढ़ाना. इसमे ख़ास सफलता नहीं मिली है। - इसके विपरीत 28 देशों के संघ यूरोपीय संघ एक कामयाब गुट है। - यूरोपीय संघ में एक देश का नागरिक दूसरे देश में बगैर पासपोर्ट के घूम सकता है - यही नहीं नौकरी कर सकता है, रह सकता है और संपत्ति खरीद सकता है। - दक्षिण एशिया में इंट्रा-रीजनल ट्रेड सिर्फ छह फीसदी है। - जबकि दुनिया के दूसरे रीजनल एसोसिएशन की बात करें तो यूरोपियन यूनियन का आपसी कारोबार 60 फीसदी है।  - वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2013-14 में भारत का सार्क देशों को निर्यात 17.3 अरब डॉलर रहा वहीं इंपोर्ट सिर्फ 2.45 अरब डॉलर ही था। - इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का कुल निर्यात 312 अबर डॉलर और आयात 450 अरब डॉलर था।

SAARC में भारत की भूमिका... - सार्क देशों की संस्कृति और रीति रिवाज लगभग एक जैसे हैं - आपस में आम लोगों के बीच मतभेद भी अधिक नहीं हैं.लेकिन इसके बावजूद ये एक दूसरे से मीलों दूर हैं, - 2014 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था - 'सिंगापुर और दुबई जाना सार्क देशों में जाने के मुकाबले अधिक आसान और सस्ता है.' - PM मोदी ने इस दिशा में पहल भी की है. शपथ ग्रहण के दौरान सार्क देशों के नेताओं को न्योता दिया और सबसे पहले नेपाल, भूटान का दौरा किया. - काठमांडू में भारत सरकार की तरफ से सार्क व्यापारियों को तीन से पांच साल तक का वीज़ा देने की पेशकश भी ऐतिहासिक कदम था. - इसके अलावा दक्षेस सैटेलाइट परियोजना- दक्षेस उपग्रह के निर्माण और प्रक्षेपण का खर्च भारत वहन करेगा

कब-कब आया SAARC में व्यवधान... - 1985 में गठन के चार साल बाद दी SAARC में सबसे पहला गतिरोध उत्पन हुआ था। - 1989 में श्रीलंका में होने वाले 5वें SAARC सम्मेलन को पहली बार स्थगित कर दिया गया था। - जिसका कारण था श्रीलंका में इंडिया पीस कीपिंग फोर्स को भेजना। - उसके बाद 1992 में दूसरी बार और जनवरी 1993 में तीसरी बार SAARC सम्मेलन को स्थगित किया गया था। - 1992-93 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश में काफी विरोध हुआ था। - हालांकि 1993 में किसी तरह बांग्लादेश में सम्मेलन हुआ लेकिन 1994 में फिर स्थगित करना पड़ा। - प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव की पहल के बाद 1995 में दिल्ली में 8वां सम्मेलन आयोजित हुआ। - 1999 में SAARC में एक बार फिर गतिरोध उत्पन हुआ। - करगिल युद्ध और पाकिस्तान में तख्तापलट और बाद में भारतीय संसद पर हमले के बाद सम्मेलन तीन साल तक स्थगित रहा।  - 2002 में काठमांडू में 11वां शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। - 2005 में सूनामी और काठमांडू में राजशाही के खिलाफ सैन्य विद्रोह ने एक बार फिर सम्मेलन पर असर डाला। - पहली बार जनवरी 2005 में यह बैठक सूनामी की वजह से रद्द हुई और दूसरी बार भारत के पीएम ने फरवरी में इस बैठक में भाग लेने से इनकार कर दिया। - भारत ने बांग्लादेश में सुरक्षा कारणों और नेपाल में राजा ज्ञानेंद्र को हटाने के कारण सार्क बैठक में न जाने का निर्णय लिया था। - 2013 में नेपाल ने आंतरिक स्थिति के चलते सम्मेलन को 2014 तक स्थगित करने की निर्णय लिया था।