पत्थरबाजों के खिलाफ केस वापस लेने से सुरक्षाबलों का गिरेगा मनोबल: केंद्र सरकार

नई दिल्ली (6 जून): केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा पत्थरबाजों के खिलाफ एफआईआर को वापस लेने के फैसले से वहां तैनात सुरक्षाबलों का मनोबल गिरेगा। आगे केंद्र ने कहा कि इस फैसले से आतंकियों को आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आम नागरिकों को ढाल की तरह इस्तेमाल करने का और साहस मिलेगा।

 सेना के 3 जवानों के बच्चों द्वारा दायर की गई याचिका के जवाब में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को जवाब दिया है। केंद्र का कहना है यह राज्य सरकार का दायित्व है कि वह जम्मू- कश्मीर में तैनात सेना के जवानों के मानवाधिकारों को बचाने के लिए पत्थरबाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।बच्चों द्वारा दायर याचिका में पूछा गया है कि सेना के जवान जो मानवाधिकार हनन का शिकार है क्या उन्हें मानवाधिकारों की रक्षा करनेवालों की जरूरत नहीं है? इसके साथ ही उस याचिका में बच्चों ने इस बात का भी जिक्र किया है कि भारत के नागरिक, युवा और खासकर एक सेना के जवान के बच्चे होने के नाते वह उन जवानों को लेकर चिंतित हैं जिनकी तैनाती ऐसे अशांत क्षेत्रों में की गई है।जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस याचिका में उस घटना का भी जिक्र है जब शोपियां में सेना के एक मेजर पर पत्थरबाजों पर गोली चलाने के लिए एफआईआर दर्ज की गई थी। रक्षा मंत्रालय द्वारा रिपोर्ट फाइल करने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 2 जून को मुख्य सचिव का जवाब भी 6 हफ्तों के अंदर मांगा था।2 लेफ्टिनेंट कर्नल के और एक रिटार्यड सूबेदार के बच्चों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मुख्य न्यायधीश एचएल दत्तु के सामने ऐमनेस्टी की उस रिपोर्ट का हवाला भी दिया है जिसमें जम्मू- कश्मीर के अशांत इलाकों में स्थानीय लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा की बात की गई है लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है इस रिपोर्ट ने वहां तैनात सुरक्षाबलों के मानवाधिकारों की रक्षा से मुंह मोड़ लिया है जिन्हें रोज पत्थरबाजों से जान का खतरा रहता है। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में आए दिन सेना पर पत्थरबाजी के मामले सामने आते रहते हैं।