एलीगेटर फाइटर्स के ऐसे खतरनाक करतब अब नहीं देखे जा सकेंगे

नई दिल्ली (8 जनवरी): इन दिनों एक एलीगेटर फाइटर की तस्वीर दुनिया भर के अखबारों में काफी पॉपुलर हो रही है। फ्लोरिडा के दलदल के चारों ओर लगे बिलबोर्ड्स के विज्ञापनों में एक अमेरिकी शख्स घड़ियाल (एलीगेटर) के मुंह को खोलते हुए दिखाई दे रहा है। वह खतरनाक तरीके से अपने चेहरे को उसके 80 नुकीले दांतों के करीब ले जाता है। इस हैरतअंगेज तस्वीर के साथ रास्ते पर निकलने वाले वाइकर्स के लिए विज्ञापन वादा करता है- ''एडवैंचर्स इंतजार कर रहे हैं।'' लेकिन ये करतब दिखाने का सिलसिला बीते साल 2015 के आखिरी रविवार को खत्म हो गया।

मिकोसुकी भारतीयों की एक सदी पुरानी परंपरा को चला रहे आखिरी शख्स ने इसे खत्म करने का फैसला कर लिया। विज्ञापन की तस्वीर में दिखने वाले शख्स का नाम है- रिकी जिम। रिकी 44 वर्षीय मिकोसुकी भारतीय है, जो पिछले 31 सालों से इन घड़ियालों से लड़ रहा था। वह अनगिनत टूरिस्ट्स का एक मिट्टी के गढ़्ढे और चिकी हट के नीचे बने तालाब में ये करतब दिखाकर मनोरंजन करता रहा। ये स्थान मियामी को पोर्ट सिटी टैंपा को जोड़ने वाली दो-लेन रोड पर स्थित है। लेकिन इस खेल को खत्म करके के साथ ही वह अपने पीछे कोई भी उत्तराधिकारी नहीं छोड़कर जा रहा है। उसकी जनजाति में करीब 600 लोग हैं। इस सिलसिले का अंत एक बजने से कुछ मिनट पहले शो के साथ खत्म हो गया, जब आखिरी बार जिम ने घड़ियाल के मुंह को खोला। मुंह खोलने के लिए जिम ने घड़ियाल की नाक पर थपकी दी थी। इसके बाद उसने अपना हाथ मुंह के अंदर डाल दिया। 

यह कदम बड़ा खतरनाक होता है खासकर अगर कोई घड़ियाल के तालु को छू ले। मीठी चीज की एक भी बूंद या रेत का कोई भी कण, ये वे कारण हैं, जिनसे उसका जबड़ा बंद हो सकता है। अपना हाथ निकालने के दौरान जिम ने हाथ हल्के से घुमाया और अचानक से एक दांत पर खुरच दिया।

जिम बताता है, ''ये एक ऐसी फीलिंग थी जैसे एक दरवाजा आपके हाथ पर बंद होने वाला हो, जिसमें पैने दांत हों। लेकिन जैसे ही घड़ियाल के जबड़े में उसने नीचे अपनी हथेली और कलाई को देखा मेरे दिमाग में बस इतना आया कि- हिलाना मत। अगर ये हिलता है, तो मेरा हाथ इसी के साथ चला जाएगा।'' घड़ियाल किस तरह से ताजे मीट को तोड़ता है इस बारे में अपने आखिरी शो के बाद जिम बताता रहा। जिम को कई बार घड़ियाल ने पहले काटा था।

एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, एलीगेटर रेसलिंग एक अमेरिकी परंपरा मानी जाती है। ये परंपरा 1990 के दशक से काफी लोकप्रिय हो गई। ये परंपरा एक अंग्रेज ने की थी, जिसका नाम था हेनरी कॉपिंगर। इतिहासकार पैटसी वेस्ट के मुताबिक, वह अमेरिका में जन्मा आयरलैंड के एक प्रवासी का बेटा था। 

कॉपिंगर खुद भी घड़ियाल से लड़ा करता था। उसने स्थानीय लोगों को भी इसके लिए रिक्रूट किया था। लेकिन आज ये परंपरा समाप्त होने जा रही है। पशुओं के अधिकार के लिए काम करने वाले समूहों ने इन शोज की आलोचना की थी। कुछ स्थानीय एलीगेटर रेसलर अभी भी सेमीनोल जनजाति के हिस्से रहे हैं। जिनका मिकोसुकीस के साथ एतिहासिक संबंध है।