उत्तराखंड विधानसभा में शक्ति परीक्षण: हरीश रावत को बहुमत का दावा

संजीव त्रिवेदी, देहरादून (10 मई): उत्तराखंड विधानसभा में आज शक्ति परीक्षण की कार्यवाही पूरी हो गई है। राज्य में दो घंटे के लिए राष्ट्रपति शासन हटा और सदन की कार्यवाही पूरी की गई। बताया जा रहा है कि विधानसभा में मौजूद विधायकों ने बंद लिफाफे में अपने वोट दिये। यह पूरी कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरी की गई। शक्ति परीक्षण का आधिकारिक ऐलान कल 10:30  बजे होगा। 

जानकारों की मानें तो बंद लिफाफे बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में खोले जाएंगे। उसके बाद ही हरीश रावत की जीत का औपचारिक ऐलान होगा। उधर, सूत्रों का दावा है कि हरीश रावत के समर्थन में 33 वोट मिले। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी को 28 वोट ही मिल सके।

हालांकि, हरीश रावत ने यह बताने से इनकार किया कि किसको कितने मत मिले। उन्होंने कहा कि शक्ति परीक्षण कोर्ट की निगरानी में हुआ, इसलिए उस पर कुछ कहना उचित नहीं होगा। नतीजे लिफाफे में बंद हैं। रावत ने ये भरोसा जताया कि नतीजे उनके पक्ष में रहेंगे। साथ ही कांग्रेस और बीजेपी के बीच वोटों का अंतर काफी बड़ा रहेगा। 

विधानसभा से बाहर आने के बाद रावत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि संकट के बादल खत्म हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड की जनता की जीत है। मुझे बहुमत मिलने का विश्वास था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करते हुए कहा कि असल में यह लोकतंत्र की जीत है।

11:15 बजे- विधानसभा की कार्यवाही पूरी होने के बाद विधायक बाहर निकाल आए हैं। बताया जा रहा है कि शक्ति परीक्षण के दौरान विधायकों ने बंद लिफामें में अपना मत दे दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट के सामने कल लिफाफे को खोला जाएगा।

11:15 बजे- तमाम गहमागहमी के बीच खबर आ रही है कि कांग्रेस के एक और विधायक बागी रेखा आर्य हो गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि वो हरीश रावत के खिलाफ वोटिंग कर सकते हैं। कांग्रेस की बागी विधायक रेखा आर्या बीजेपी खेमे में शामिल हो गई हैं।

​11:10 बजे- विधानयभा में शुरू हुई शक्ति परीक्षण की कार्यवाही। भीतर कैमरे और मोबाइल फोन ले जाने पर लगा है प्रतिबंध।

11:00 बजे- बीएसपी प्रमुख मायावती ने ऐलान किया कि पार्टी के दोनों विधायक हरीश रावत के समर्थन में वोट देंगे। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए यह फैसला लिया।

10:45 बजे- विधानसभा में परीक्षण के लिए हरीश रावत पहुंचे। विधानसभा के भीतर गाड़ियां और मोबाइल फोन ले जाने पर रोक।