कभी पकड़ती थी मछली, आज है मशहूर शूटर

नई दिल्ली(19 जुलाई): 15 साल की उम्र तक मनीषा ने कभी नहीं सोचा था कि फिशिंग और शूटिंग का इतना करीबी नाता होगा। शूटर मनीषा कीर की जिंदगी अब से तीन साल पहले बेहद अलग थी।

मनीषा के दिन की शुरुआत भोपाल झील में मछलियां पकड़ने में पिता की मदद करने से शुरू होती थी। उनके पिता कैलाश कीर मछलियों को बाजार में बेचते और परिवार का पेट पाला करते। मनीषा के दिन भी पिता की मदद में ही गुजर रहे थे। मनीषा की बड़ी बहन सोनिया एक दिन उन्हें मध्य प्रदेश शूटिंग अकेडमी ले गईं जहां शॉटगन ट्रायल हो रहे थे। मनीषा के निशाने का कमाल यहां ओलिंपियन मनशेर सिंह ने देखा जो अकेडमी के मुख्य कोच थे। उन्होंने मनीषा को एक लक्ष्य दिया जिसे मनीषा ने एक पेशेवर शूटर की तरह राइफल से हिट कर दिया। 

यहीं से मनीषा की जिंदगी बदल गई। कभी परिवार का पेट पालने में पिता की मदद करने वाली लड़की आज देश की ओलिंपिक मेडल की उम्मीद है। तीन सालों में मनीषा ने तीन नैशनल और दो इंटरनैशनल इवेंट में हिस्सा लिया। उन्होंने अब तक 10 मेडल झटके हैं। 

भोपाल के बाहरी इलाके गोरेगांव में रहने वाली मनीषा ने मई 2016 में फिनलैंड में जूनियर शॉटगन कप में गोल्ड जीता।