रियो ओलंपिक्स में हिस्सा लेगी 'शरणार्थी' टीम

नई दिल्ली (5 जून): अगस्त में होने वाले रियो ओलिम्पिक खेलों में 10 शरणार्थियों का एक दल भी हिस्सा लेगा। अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति (आईओसी) ने इस बात की पुष्टि की। विखंडित और संघर्ष कर रहे देशों के इन एथलीटों के प्रतिनिधित्व करता हुआ एक नया ध्वज भी इन ओलिम्पिक खेलों में नजर आएगा। आईओसी के इस फैसले का संयुक्त राष्ट्र ने स्वागत किया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, रियो 2016 की आधिकारिक वेबसाइट में शुक्रवार को बताया गया कि वे ऐसी टीम का निर्माण करेंगे, जिसे आज से पहले किसी भी ओलम्पिक खेलों में नहीं देखा गया है।

विश्व में युद्ध और सामाजिक अशांति के कारण विस्थापित हुए लोगों के लिए यह दल एक आशा की किरण है। ओलम्पिक खेलों में हिस्सा लेने वाले शरणार्थियों के इस दल में दक्षिण सूडान के पांच धावक, सीरिया के दो तैराक, कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य के दो जूड़ो-कराटे खिलाड़ी और इथियोपिया का एक मैराथन धावक शामिल है। ये सभी पहले शरणार्थी ओलम्पिक दल (आरओटी) का हिस्सा होंगे। इस दल का नेतृत्व पूर्व विश्व रिकॉर्ड धारी मैराथन धावक तेगला लोरोपे करेंगी। इस दल की उपकप्तान ब्राजील की इसाबेला मजाओ होंगी।

आरओटी के इस दल में पांच कोच और पांच अन्य अधिकारी भी शामिल होंगे। आईओसी के इस फैसले का यूएन की शरणार्थी एजेंसी ने स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों के उच्चायुक्त ने कहा कि इन सभी खिलाड़ियों ने अपने-अपने देशों में हिंसा का सामना किया और फिर बेल्जियम, जर्मनी, लक्जमबर्ग, केन्या, ब्राजील जैसे देशों में इन लोगों ने शरण ली। शरणार्थियों की पहली टीम माराकाना स्टेडियम में होने वाले उद्घाटन समारोह में ओलम्पिक के झंडे तले हिस्सा लेगी। पूरे ओलम्पिक में उन्हें दूसरी टीमों की तरह ही माना जाएगा। टीम का खर्च आईओसी उठायेगा।