2016: वो जो पहली बार हुआ...!

नई दिल्ली (23 दिसंबर):  बीते साल उठा-पठक भरा  रहा है। इसी बीच कुछ ऐसा भी हुआ कि जो अब से पहले कभी नहीं हुआ। आइए, ऐसी ही कुछ घटनाओँ पर नजर डालते हैंः

प्रदूषणः दिल्ली में तीन दिन के लिए स्कूल बंद

नवंबर महीने के पहले ही हफ्ते में प्रदूषण की लगातार खराब होती स्थिति को ध्यान में रखते हुए पहली बार दिल्ली के सभी स्कूलों को तीन दिनों तक बंद रखने का आदेश दिया गया। इसके अलावा पांच दिन तक सभी निर्माण कार्य और डेमोलिशन कार्य भी बंद कर दिए गए। बदरपुर थर्मल प्लांट को भी 10 दिन तक बंद किया गया। अनुमान के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर प्रति घन मीटर 999 माइक्रोग्राम पार्टिकुलेट मैटर के स्तर पर पहुंच गया था, जो सुरक्षित समझी जाने वाली सीमा से 15 से 16 गुणा ज्यादा था। कुछ देशों ने तो अपने नागरिकों को दिल्‍ली जाने के लिए एडवाइजरी तक जारी कर दी थी।

7वां वेतन आयोग 

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सोमवार 25 जुलाई को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से जुड़ा गजट नोटिफिकेशन जारी क्या किया, लाखों कर्मचारियों के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई। इस नोटिफिकेशन का केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारियों को बेसब्री से इंतजार था।

विश्व सांस्कृतिक महोत्सव

दिल्ली में यमुना तट पर 'आर्ट ऑफ लिविंग' के तीन दिवसीय विश्व सांस्कृतिक महोत्सव को लेकर भी बड़ा बवाल हुआ। कभी विरोध में कुछ नेताओं ने झंडा बुलंद किया तो कभी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल इसकी अनुमति देने वाली डीडीए की खिंचाई की। यमुना तट की सफाई को लेकर भी कम हो-हल्ला नहीं मचा, लेकिन इस मुद्दे पर ही हल मंच से ही निकला। यमुना व पर्यावरण की बेहतरी के लिए काम करने पर रजामंदी हुई और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी कहा कि सरकार यमुना को साफ करने के लिए काम कर रही है।

 विधायकों के साथ मुख्यमंत्री ने बदली पार्टी

अरुणाचल प्रदेश में सितंबर महीने में कांग्रेस को एक बार फिर बगावत झेलनी पड़ी, बता दें कि पिछले 10 महीनों में यह दूसरी बगावत थी। शुक्रवार 16 सितंबर को कांग्रेस के 43 और 2 निर्दलीय विधायक पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) में शामिल हो गए। इस बार की बगावत की खास बात यह कि बागियों में वर्तमान मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी शामिल थे। बता दें कि इससे करीब दो महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस को राज्य में दोबारा सत्ता हासिल हुई थी।

हेलीकॉप्टर से बुझाई गई उत्तराखण्ड के जंगलों की आग

उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के जंगलों में लगी आग इस साल गर्मियों में बेकाबू हो गई। आग से तमाम जंगल दहक उठे। जगलों में लगी भीषण आग पर काबू पाने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अर्द्धसैनिक बलों तक को लगाया गया। इसके अलावा उत्तराखंड में सेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर की मदद से पानी का छिड़काव करके आग बुझाई गई। भीषण आग से हर साल की तरह इस साल भी करोड़ों रुपये की वन संपदा नष्ट हो गई।

गुरुग्राम में महाजाम

जुलाई के अंतिम दिनों में मानसून अपने चरम पर था और ऐसे में मूसलाधार बारिश ने सड़कों को नदी में तब्दील कर दिया। 28 जुलाई की शाम दिल्ली, गुड़गांव, नोएडा के कई इलाकों में भारी ट्रैफिक जाम लग गया। आलम यह रहा कि लोगों को सड़क पर ही गाड़ी के अंदर रात गुजारनी पड़ी। करीब 16 घंटे चले इस जाम में अगले दिन भी यही स्थिति बनी रही और गाड़ियां सड़कों पर रेंगती नजर आयीं। इसकी वजह से शुक्रवार को कई दफ्तरों और स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई थी।

 किसान महायात्रा में 'खाट की लूट-पाट'

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करने के इरादे से पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्यभर में किसान यात्रा की। इस दौरान उन्होंने देवरिया के रुद्रपुर में किसानों से बात करने के लिए एक खाट सभा का आयोजन किया। यहां आए लोगों ने सभा के बाद खाटें लूट लीं। गांव के लोग खाट उठाकर अपने-अपने घर जाने लगे, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता खाटों को ट्रक में लदवाने के बाद आगे की सभा की तैयारी में जुटे हुए थे। गांव के लोग उस खाट को भी उठाकर भाग गए, जिसपर राहुल गांधी बैठे थे।

 कूड़ा-कूड़ा हुई दिल्ली

दिल्ली में साफ-सफाई का जिम्मा MCD के पास है, लेकिन निगम के कर्मचारियों ने जनवरी 2016 में पूरी दिल्ली को कूड़ा-कूड़ा कर दिया। साल के पहले महीने में MCD के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण राजधानी दिल्‍ली के कई जगहों पर कूड़े का अंबार लग गया। इस दौरान कुल 60,000 कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। पूर्वी दिल्‍ली समेत तमाम जगहों पर इसके चलते गंदगी का ढेर लग गए। नियमित वेतन भुगतान, बकाया राशि (एरियर) भुगतान सहित अन्य मांगों को लेकर नगर निगम सफाई के कर्मचारियों ने यह हड़ताल की थी। इस दौरान दिल्‍ली सरकार के मंत्रियों के घरों के बाहर भी नाराज कर्मियों ने कूड़ा डालकर प्रदर्शन किया।

पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला खाली करने के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को दो माह के अंदर सरकारी बंगले खाली करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने करीब दो दशक पुराने उस नियम को गैर कानूनी ठहरा दिया, जिसमें यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों को जिंदगीभर सरकारी आवास मुहैया कराने की बात थी। इसके बाद उत्तराखंड में भी पूर्व मुख्यमंत्रियों से बंगले खाली कराने की मुहिम चलाई गई और नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से न सिर्फ बंगले खाली कराने को कहा, बल्कि सरकार को आदेश दिया कि वह किराया भी वसूले।