सुहागरात से जुड़ी ये बातें जानकर आप हैरान हो जाएंगे!

नई दिल्ली(22 जून): भारतीय संस्कृति में विवाह परंपरा को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। लेकिन विवाह के बाद पहली रात यानी सुहागरात के पीछे कई रीति-रिवाज हैं तो कई अंधविश्वास।

-कहते हैं सुहागरात को नववधू के तकिए के नीचे पनीर रखने से संतान की जल्द ही प्राप्ति होती है। कहीं-कहीं माना जाता है कि पहली रात के समय व्यक्ति का मौत से साक्षात्कार होता है, यानी नवविवाहित जोड़े इतने अधिक खुश होते हैं कि वो इस खुशी में मर भी सकते हैं।

-विवाह के बाद, सुहागरात को नव वर-वधू के कमरे को फूलों से सजाया जाता है। यह एक पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन से लोग अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं। इसलिए शयन कक्ष का माहौल रोमांटिक बनाया जाता है। कहीं-कहीं तो फूलों के साथ ही सुगंधित मिठाई भी कमरे में रखने का रिवाज है। इस दिन शयन कक्ष को सुगंधित फूल रजनीगंधा, गुलाब, चमेली या फिर कामेच्छा बढ़ाने वाले मादक फूलों से शयन कक्ष को सजाया जाता है।

-सुहागरात की रात में दूल्हे के दोस्त या दूल्हे के रिश्तेदार (जिनमें महिलाएं भी हो सकती हैं) दूल्हे के शयन कक्ष पर खड़े होते हैं। वह उसे अंदर नहीं जाने देते, ऐसे में दूल्हा शगुन के रूप में कुछ देता है। इस दौरान कहीं-कहीं तो भद्दा मजाक भी होता है। लेकिन दूल्हा इतनी खुशी में होता है कि वह इन बातों को नकार देता है।

-इसके बाद जब दूल्हा अंदर शयन कक्ष में जाता है तो दुल्हन, पारंपरिक भारतीय पोशाक में दूल्हे का इंतजार कर रही होती है। दूल्हा, दुल्हन से घूंघट उठाने की अनुमति मांगता है। इस रस्म को मुंह दिखाई रस्म कहा जाता है। इस दौरान दूल्हा, दुल्हन को उपहार स्वरूप कुछ यादगार वस्तु देता है।

-विवाह दो आत्माओं का मिलन का उत्सव है और सुहागरात की रात इस उत्सव की गवाह। इस रात में सोने से पहले नवविवाहिता स्त्री पारंपरिक रूप से बादाम, केसर और काली मिर्च के मिश्रण से दूध तैयार करती है। यह दूध वह अपने पति को देती है। दूध कामेच्छा को बढ़ाता है।

-कामसूत्र में दूध के साथ सौंफ का रस, शहद, चीनी के पेय के बारे में उल्लेख मिलता है। इस ग्रंथ में दूल्हे और दुल्हन को दूध में केसर, सौंफ का रस देने का रिवाज है।

-हिंदू धर्म में भी इस तरह की मान्यताएं सदियों से चली आ रही हैं। सुहागरात के दिन दूध पीना वैज्ञानिक रूप से भी बेहतर माना गया है। हम सभी जानते हैं कि विवाह से पहले सेक्स हिंदू रीति-रिवाज में ठीक नहीं माना जाता है। इसलिए प्राचीन परंपरा यह भी चली आ रही है, सुहागरात के दिन वधू को कौमार्य का सबूत देना होता है। ऐसे में उसके बिस्तर पर निशान नहीं होने पर आज भी कई क्षेत्रों में लोग नववधू को शक की निगाह से देखते हैं, लेकिन यह मान्यता आज के समय में सबसे बेतुकी है।