तैयार हुआ क्लोन से पहला बंदर

नई दिल्ली(25 जनवरी): चीन में वैज्ञानिकों ने क्लोनिंग तकनीक में बड़ी सफलता हासिल की है। जिस तकनीक की मदद से 20 साल पहले डॉली नाम की भेड़ को क्लोन से तैयार किया गया था, उसी से दो क्लोन बंदरों को भी चीन के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। 

- लंबी पूंछ वाले इन दोनों बंदरों का नाम हुआ हुआ और चोंग चोंग है। उनका जन्म शंघाई स्थित चाइनीज अकैडमी ऑफ साइंसेज (सीएएस) इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस में हुआ है। यह समैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर नाम की क्लोनिंग तकनीक में वर्षों के रिसर्च का फल है। इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस ऑफ सीएएस सेंटर फॉर एक्सिलेंस इन ब्रेन साइंस ऐंड इंटेलिजेंस टेक्नॉलजी के निदेशक मुमिंग फू ने बताया, 'इस काम से बाधाएं खत्म हो गई हैं।

- अब तक इस तकनीक का इस्तेमाल कुत्ता, सुअर और बिल्ली समेत 20 से ज्यादा जानवर की प्रजातियों का क्लोन तैयार करने के लिए किया जाता था। लेकिन यह तकनीक इंसान से मिलते-जुलते पशुओं के लिए मुश्किल साबित हुई थी। इन बंदरों के जन्म से यह सवाल भी उठा है कि वैज्ञानिक अब इंसान का क्लोन तैयार करने के कितने करीब आ गए हैं। 

- फू ने बताया कि एक दिन इस तकनीक का इस्तेमाल एक जैसे जींस वाले बंदरों को बड़ी संख्या में तैयार करने के लिए किया जा सकता है जो चिकित्सा शोध में काफी सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि अब जंगलों से जानवरों को पकड़ने की जरूरत नहीं रहेगी। फू के मुताबिक, अकेले संयुक्त राज्य में हर साल 30,000 से 40,000 बंदरों का आयात दवा कंपनियों द्वारा किया जाता है। 

-आपको बता दें कि दिमाग की बीमारियों जैसे पार्किंसंस, कैंसर, प्रतिरोधी क्षमता और मेटाबॉलिक विकार के लिए चिकित्सा शोधों में आमतौर पर बंदर का इस्तेमाल किया जाता है। इससे अब मेडिकल रिसर्च के मैदान में बहुत मदद मिलेगी।