इस रेसलर ने जीता था इंडिया से पहला ओलिंपिक मेडल

नई दिल्ली(23 जुलाई): रियो ओलिंपिक शुरू होने में दो हफ्ते से कम दिन बाकी हैं। 2012 लंदन  ओलिंपिक में अब तक का अपना बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला भारत इस बार 100 एथलेटिक्स का दल रियो में भेज रहा है। ओलिंपिक में जाने वाला ये अब तक का सबसे बड़ा भारतीय दल है। ऐसे में मेडल जीतने की आस भी ज्यादा हैं। ओलिंपिक में अब तक 28 मेडल जीत चुका भारत को हर बार कुश्ती से पदक की उम्मीद रहती है। हो भी क्यों ना क्योंकि कुश्ती ने ही भारत को ओलिंपिक में पहल मेडल दिलाया था। 

ये मेडल दिलाने वाल थे हरियाणा के दादासाहब जाधव। दादासाहब जाधव ने साल 1952 में हुए हेलसिंकी गेम्स में कुश्ती में ब्रांज मेडल जीता था। खाशाबा को 'पॉकेट डायनमो' के नाम से भी जाना जाता है। 

दादासाहब जाधव ने 1948 में पहली बार ओलिंपिक में भाग लिया था। तब कोल्हापुर के महाराजा ने उनकी लंदन यात्रा का खर्चा उठाया था। हालांकि, तब वह कोई भी कुश्ती का मैच नहीं जीत पाए थे।

इसके बाद उन्होंने हेलसिंकी गेम्स के लिए क्वालिफाई किया। लेकिन वहां पहुंचने के लिए उनके पास पैसे तक नहीं थे। राज्य सरकार से बार-बार मदद मांगने के बाद उन्हें चार हजार रुपए की राशि मिली। बाकी के पैसों का इंतजाम करने के लिए उन्हें अपना घर कॉलेज के प्रिंसिपल के पास गिरवी रखना पड़ा। इसके बदले उनके प्रिंसिपल ने उन्हें सात हजार रुपए की मदद की थी।

जाधव ने हेलसिंकी में ब्रॉंज मेडल जीता, लेकिन वह हेलसिंकी की मैट सर्फेस पर वे एडजस्ट नहीं कर सके। वह नियमों के खिलाफ लगातार दो बाउट रखवाए गए थे और गोल्ड पदक से चूक गए। भारत लौटने के बाद उन्होंने फिर कुश्ती लड़ी और जीत के पैसों से अपने प्रिंसिपल से अपना गिरवी रखा घर छुड़वाया था।